वाराणसी। जिस समय बजरंगी ने अपराध जगत में अपनी पहचान बनानी शुरू उन दिनों सिर्फ बृजेश और मुख्तार के नाम चलते थे। एक के बाद एक कर सनसनीखेज वारदातों को अंजाम देकर बजरंगी गिरोह ने अलग पहचान बनायी थी। वजह, शूटरों की जो खेप इस गिरोह के पास थी वह किसी और के नहीं। नये शूटरों की पहचान और उन्हें ट्रेंड कर घटनाओं के अंजाम दिलाने में लेफ्टीनेंट रहे कृपा चौधरी का कोई सानी नहीं था। यह सब कुछ तब तक चला जब तक बजरंगी जेल की सलाखों के पीछे नहीं पहुंचा था। जेल में जाने के बाद कारोबारी ‘मैनेजरों’ ने बजरंगी को कुछ ऐसा घेरा कि वह अंत तक उनके शिकंजे से निकल नहीं पाया। अपराध जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि साले पुष्पजीत उर्फ पीजे की ‘पीके’को दी एक गारी पूरे गिरोह के बर्बादी का सबब बन गयी। खास यह कि खुद मुन्ना ने इस मामले में दखल नहीं दिया जिसका नतीजा रहा कि किसी जमाने में मदद करने वाले कटते गये। इसके अलावा गिरोह के भीतर आपसी खींचतान भी विरोधियों को मजबूत की।

नये शूटरों की कमी खली

कृपा चौधरी के करीबी रिश्तेदार राजेश चौधरी ने गिरोह के लिए कई बड़ी वारदातों को अंजाम दिया। दुस्साहस ऐसा कि मुख्तार के करीबी से भी रंगदारी मांग ली और न देने पर फायरिंग से नहीं चूका। गिरोह से ही जुड़े धर्मेन्द्र उर्फ रिंकू सिंह, वकील पाण्डेय, रुद्रेश उर्फ पिंटू उपाध्याय तथा अमजद ने राजेश चौधरी को मिलने की खातिर लखनिया दरी बुलाया। वहां किसी बात को लेकर कहासुनी में राजेश चौधरी के संग सूरज और एक अन्य को गोली मार कर मौत के घाट उतार दिया गया। इस वारदात के बाद से रिंकू अपनी अलग पहचान बनाने में जुट गया। डिप्टी जेलर अनिल त्यागी और धनबाद के डिप्टी मेयर रह चुके नीरज सिंह समेत चार लोगों को गोलियों से छलनी कर उसने खुद को साबित भी कर दिया। नतीजा, गाजीपुर जेल में निरुद्ध रिंकू के पास 50 हजारा इनामियों समेत शार्प शूटरों की फौज ही नहीं खड़ी हुई बल्कि लंबी वसूली आने लगी।

कारोबार में बजरंगी का था पूरा ध्यान!

दूसरी तरफ बजरंगी को लगता था कि उसका खुद का इतना बड़ा नाम है कि दूसरे किसी की जरूरत नहीं। उसने नये शूटरों की भर्ती और उनके जरिये पीजे व तारिक का बदला लेने के स्थान पर कारोबार पर पूरा ध्यान केन्द्रित किया। कोर ग्रुप के लोग समझाते थे कि बाहर निकलने भर की देरी है, विरोधी खुद ब खुद मर जायेंगे। पूर्वांचल से लेकर पश्चिम उत्तर प्रदेश तक बजरंगी के विरोधियों की संख्या बढ़ती गयी। इसके बाद ऐसा सिंडिकेट तैयार हुआ जिसने एक झटके में उसे ही नहीं बल्कि गिरोह को समाप्त कर दिया।

कई पहुंचे आका की शरण तो कुछ विरोधी गुट के पास

बजरंगी की हत्या के बाद उससे जुड़े कई लोग लोग पुराने आका के शरण में पहुंच चुके हैं। फिलहाल उन्होंने भी इनकी हौसलाअफजाई करते हुए भरोसा दिया है। सूत्रों की माने तो बजरंगी की मौत के बाद उससे जुड़े कुछ विरोधी खेमे में भी जा मिले हैं। अब पूर्वांचल में खुद को साबित करने की होड़ में वारदात के अंदेशे से पुलिस भी सक्रिय हो गयी है। संदिग्धों पर नजर रखने के साथ कॉल खंगाली जा रही हैं।

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