भदोही। राज्यसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को खुलेआम वोट कर सुर्खियों में आये ज्ञानपुर के विधायक विजय मिश्र ने निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद पर संगीन आरोप लगाये हैं। पार्टी से निकाले जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए उनका कहना था कि निषाद पार्टी अब बची ही कहां है। गोरखपुर उपचुनाव में संजय निषाद ने इसका सपा में विलय कर दिया था। यही कारण था कि उनके बेटे को सपा के सिंबल से चुनाव लड़या गया जबकि वह संपा का प्राथमिक सदस्य तक नहीं था। वैसे भी डा. संजय निषाद सीधे-साधे दलितों को बेवकूफ बना कर पूरे देश भर में वसूली करने में जुटे हैं। उनका कच्चा-चिट्ठा खुलने लगा था जिससे वह सपा की शरण में गये।

देश भर में फैले हैं वसूली एजेंट

विजय मिश्र की माने तो डा. संजय निषाद ने सीधे लोगों को सब्जबाग दिखाने के साथ देश भर के उन गांव जहां निषाद और बिन्द सरीखी आबादी रहती है वहां निषादराज की आरती शुरू करायी। इसमें जो भी चढ़ावा चढ़ता है उसका 60 फीसदी डा. संजय निषाद के पास जाता है जबकि शेष 40 प्रतिशत स्थानीय एजेंट रख लेता है। लाखों रूपये की वसूली प्रतिमाह इसी से हो जाती है। राष्ट्रीय महासचिव और पार्टी का इकलौता विधायक होने के बावजूद गोरखपुर चुनाव में अपने बेटे के लिए सौदेबाजी करते समय मुझे अंधेरे में रखा। दो सीट और कुछ करोड़ रुपये के एवज में सपा में पार्टी का समायोजन करने वाले हम पर क्या आरोप लगायेंगे।

अपने दम पर जीते थे ‘जनबली’

ज्ञानपुर से चौथी बार विधानसभा का चुनाव जीतने वाले विजय मिश्र के मायावती से 36 के रिश्ते रहे हैं। अखिलेश ने भी पिछले विधानसभा में टिकट काट दिया था। वह चुनाव जीते थे तो पार्टी सिंबल के बूते नहीं बल्कि अपनी लोकप्रियता के चलते। सहस्त्रचंडी महायज्ञ के साल में कई बार होने वाले आयोजन में उनके यहां 50 हजार से अधिक लोग जुटते हैं। विरोधी भले उन पर बाहुबली होने का आरोप लगाते हैं लेकिन विजय मिश्र ने जो जनाधार बना रखा है वही उनकी जीत का सबब रहता है। देखना है कि वह भाजपा मे शामिल होते हैं या निर्दलीय विधायक के रूप में रहते हैं।

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