बाहुबली रमाकांत का ‘ग्रैंड शो’ लेकिन पुराने सपा नेता बेचैन क्यों! अखिलेश के साथ पूर्व सांसद को लेकर बढ़ी सरगर्मी

लखनऊ। बाहुबली पूर्व सांसद रमाकांत यादव ने लगभग डेढ़ दशक के बाद भाजपा और कांग्रेस के बाद रविवार को एक बार फिर से सपा की सदस्यता ले ली है। सैकड़ों गाड़ियों के काफिले के साथ प्रदेश की राजधानी पहुंचे रमाकांत को औपचारिक रूप से सदस्यता मिल गये लेकिन इससे पार्टी के पुराने नेता जिनमें पूर्व मंत्री भी शामिल है खुल कर टिप्पणी नहीं कर रहे हैं। दरअसल सपा के दिग्गज नेता बलराम यादव समेत दूसरों से रमाकांत के रिश्ते ठीक नहीं रहे हैं। वह पिछले लोकसभा चुनाव के पहले तक सपा संरक्षण मुलायम सिंह पर टिप्पणी करते रहे और अब एक बार फिर साइकिल की सवारी करते देख वह खुद को असहज स्थिति में देख रहे हैं।

लगातार हार से अखिलेश का बदला विचार!

गौरतलब है कि अखिलेश यादव राजनीति में बाहुबलियों का खुल कर विरोध करते थे। सूबे का मुख्यमंत्री बनने से पहले उन्होंने 2012 के विधानसभा चुनावों में दागदार दामन वालों को पार्टी में घुसने नहीं दिया था। पिता और चाचा शिवपाल की सहमति के बाद पार्टी में इंट्री पाने वाले अंसारी परिवार को बाहर का रास्ता दिखा कर दम लिया। विधानसभा चुनावों के बाद लोकसभा में भी चिर विरोधी बसपा से गठबंधन काम नहीं आया और सपा सात सीटे से पांच पर अ गयी। राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार मिल रही हार से अखिलेश भी अब ‘जिताऊ’ चाहते हैं भले दामन दागदार क्यों न हो।

योगी के थे खास तो कहा नहीं जायेगी लाश

रमाकांत यादव से कोई दल अछूता नहीं रहा है लेकिन कहा जाता है कि भाजपा में उनकी इंट्री योगी आदित्यनाथ के चलते हुई थी। आजमगढ़ से भाजपा सांसद बनने के पहले उन्हें सपा से बाहर निकाला गया था तो कहा था कि मेरी लाश तक सपा में नहीं जायेगी। इंट्री मिलने के बाद अब कहते फिर रहे हैं कि लाश नहीं मैं खुद आया यूं। रमाकांत की राजनीति सवर्ण विरोध और पिछड़ों के नेता के रूप में रही है लेकिन जनपद के दूसरे नेता जो मुलायम से लेकर अखिलेश को यहां का सांसद बनाये वह बदलते घटनाक्रम से खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।

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