बाहुबली रमाकांत पर टिकी सपा की ‘आस’, पिछले चुनाव की तरह दे दिया भाजपा का साथ तो चौंकाने वाला होगा परिणाम

आजमगढ़। पिछली बार की तरह इस दफा भी पूर्वांचल ही नहीं बल्कि प्रदेश की सर्वाधिक हाई प्रोफाइल सीट में जनपद का नाम शामिल होने जा रहा है। दरअसल जब सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश ने यहां से चुनाव लड़ने की घोषणा की थी तो लगा कि यादव-मुस्लिम के संंग दलित समीकरणों से विजय आसान है लेकिन भाजपा ने नहले पर दहला जड़ते हुए भोजपुरी सुपर स्टार दिनेशलाल यादव निरहुआ को उतार कर साफ कर दिया कि वॉकोवर देने वाली नहीं है। अब सपा की उम्मीदे पूर्व सांसद बाहुबली रमाकांत पर टिकी हैं। रमाकांत यहां से टिकट के प्रबल दावेदार ही नहीं थे बल्कि उनके पुत्र भाजपा के विधायक भी हैं। ऐसे में यदि रमाकांत ने निरहुआ का साथ दे दिया तो समीकरण ही नहीं बदलेंगे बल्कि परिणाम चौंकाने वाले हो सकते हैं।

कुनबा उतारने पर जीते थे मुलायम

पिछले लोकसभा चुनाव के समय प्रदेश में सपा की सरकार थी। इन्हीं समीकरणों को ध्यान में रख कर मुलायम सिंह यादव ने पर्चा दाखिल किया था। सपा को पूरा विश्वास था कि जीत अराम से हो जायेगी लेकिन सदर विधायक ने एक सप्ताह पहले चेताया कि नेताजी हारने वाले हैं। बहू डिंपल समेत पूरा कुनबा गांव-गांव छानने में जुट गये। बावजूद इसके मुलायम 63 हजार वोट से जीत पाये थे। रमाकांत हारे तो लेकिन 2.77 लाख वोट हासिल कर उन्होंने दिखा दिया कि आजमगढ़ में उन्हें चुनौती देना आसान नहीं है। दलित से लेकर सवर्ण वोटरों में उनकी जबरदस्त पकड़ है। युवाओं को साधने में निरहुआ काफी हैं और रमाकांत का साथ मिल गया तो अखिलेश को प्रचंड गर्मी में पसीने ही नहीं बहाने होंगे बल्कि बुआ को भी बुलाना पड़ सकता है।

बयानबाजी पड़ी बाहुबली को भारी

दरअसल गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव के बाद रमाकांत ने सीएम योगी को लेकर विवादित बयान दिये थे। यही नहीं केन्द्रीय मंत्री राजनाथ सिंह को भी खरीखोटी सुनायी थी। रमाकांत को भाजपा में लाने वालों में योगी थे और उनके खिलाफ दिये बयान भारी पड़ गये। बावजूद इसके अंतिम समय तक टिकट के दावेदारों में उनका नाम सबसे उपर था लेकिन निरहुआ का ग्लैमर भारी पड़ा। पार्टी में अपनी स्थिति को फिर से मजबूत करने और पुत्र को मंत्री बनाने के आफर पर उन्होंने भाजपा का प्रचार भर कर दिया तो तस्वीर बदल सकती हैै।

Related posts