मऊ। ठेकेदार अजय प्रकाश सिंह उर्फ मन्ना सिंह की आठ साल पहले हुई हत्या के मामले में गवाह रामसिंह मौर्या और उनकी सुरक्षा में लगे सिपाही सतीश की हत्याकांड के मामले में आरोपी सदर विधायक मुख्तार अंसारी को एक बड़ा झटका लगा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट के इस फैसले के बाद मुख्तार समर्थक निराश हैं। समर्थकों को उम्मीद थी कि लोकसभा चुनाव के पहले मुख्तार अंसारी जेल से बाहर आएंगे और उनकी राजनीतिक सक्रियता बढ़ेगी। लेकिन कोर्ट के आदेश ने समर्थकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

क्या था मामला ?

अभियोजन के मुताबित ठेकेदार अजय प्रकाश सिंह उर्फ मन्ना सिंह की हत्या के मामले में गवाह रहे रामसिंह मौर्या और सुरक्षा में लगा सिपाही सतीश की 19 मार्च 2010 को तत्कालीन एआरटीओ कार्यालय के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बावत वादी मुकदमा अशो‌क सिंह की तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज हुई। इसमें सदर विधायक मुख्तार अंसारी सहित पांच लोगों को नामजद तथा कुछ अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया। पुलिस ने विवेचना के बाद मुख्तार अंसारी, रामदुलारे, अनुज कन्नौजिया, पंकज यादव, रामू मल्लाह, राकेश उर्फ हनुमान पांडेय, शिवशंकर यादव, धर्मेन्द्र सोनकर, राजेश सिंह उर्फ राजन सिंह, बृजेश सोनकर और जामवंत उर्फ राजू के विरूद्ध आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियोजन की ओर से पैरवी करते हुए एडीजीसी शिवदत यादव और मणिबहादुर सिंह तथा अधिवक्ता फतेहबहादुर सिंह, अमरनाथ सिंह ने वादी सहित कुल 16 गवाहों को पेशकर अपना पक्ष रखा।

मुख्तार ने दी सफाई, फंसाया राजनैतिक प्रतिद्वंदिता में

सदर विधायक मुख्तार अंसारी के समर्थकों का आरोप है कि विधायक 2005 से जेल में बंद है। राजनैतिक प्रतिद्धंदिता के चलते उन्हें मन्ना सिंह की हत्या में फंसाया गया था। इस मामले में भी उसी के चलते फंसाया गया है। गौरतलब है कि कुछ माह पहले मन्ना सिंह हत्याकांड में साक्ष्य के आभाव में मुख्तार को बरी किया गया था।

admin

No Comments

Leave a Comment