गोरखपुर। बाहुबली हरिशंकर तिवारी के बहुचर्चित आवास हाता पर छापेमारी के बाद गोरखपुर की सियासत गरमाने लगी है। छापेमारी के खिलाफ बीएसपी हरिशकंर तिवारी के समर्थन में उतर आई है। योगी आदित्यनाथ को जवाब देने के लिए हरिशंकर तिवारी के समर्थकों ने शक्ति प्रदर्शन किया और अपनी सियासी ताकत का एहसास कराया। इस दौरान बसपा प्रदेश अध्यक्ष रामअंचल राजभर ने ऐलान किया कि मुख्यमंत्री ने जिस तरह द्वेष भावना से प्रतिष्ठित राजनैतिक परिवार का पुलिस से अपमान कराया है, उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। इस मामले को लेकर सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष किया जाएगा।

चिल्लूपार में चलता है हरिशंकर तिवारी का सिक्का

जानकार बताते हैं कि योगी आदित्यनाथ और बाहुबली हरिशकंर तिवारी के बीच लंबे समय से राजनीतिक प्रतिद्वंदिता चली आ रही है। विधानसभा चुनाव में भी इसका नजारा देखने को मिला था। योगी आदित्यनाथ की लाख कोशिशों के बाद भी हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी चिल्लूपार से विधायक बनने में कामयाब रहे। इस सीट से उनके पिता हरिशंकर तिवारी कई बार विधायक रहे हैं। तिवारी 23 साल तक लगातार विधानसभा के सदस्य रहे। गोरखपुर जिले कि 9 विधान सभा सीटों में से सिर्फ यही एक सीट थी जहां भाजपा को हार मिली। चिल्लूपार सीट को हरिशंकर तिवारी के परिवार की परंपरागत सीट मानी जाती है।

हरिशंकर और योगी में है छत्तीस का आंकड़ा

गोरखपुर की सियासत में हरिशंकर तिवारी की बड़े ब्राह्मण चेहरे के तौर पर होती है। सरकार किसी भी पार्टी की हो लेकिन हरिशंकर तिवारी की हनक कभी कम नहीं हुई। मुलायम से लेकर कल्याण सिंह और अब मायावती। हरिशंकर तिवारी को हर किसी ने गले लगाया। मुलायम सिंह और कल्याण सिंह की सरकार में तिवारी कैबिनेट मिनिस्टर तक के पद पर रहे। हरिशंकर तिवारी की हनक का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिस समय दाउद जैसा माफिया अपराध की दुनिया में कदम रखा था,उस समय हरिशंकर तिवारी और स्व. वीरेंद्र शाही के बीच होने वाले गैंगवार की चर्चा अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में होती थी तिवारी का रसूख यू.पी बिहार और नेपाल तक कायम था|

गोरखपुर में सत्ता के केंद्र है हाता और गोरक्षनाथ मंदिर

जानकार बताते हैं कि गोरखपुर में सत्ता के दो प्रमुख केंद्र रहे हैं। एक ओर जहा हाता जो हरिशंकर तिवार परिवार का आवास है तो दूसरी ओर गोरक्षनाथ मंदिर। योगी आदित्यनाथ इसी मंदिर के महंत हैं। बताते हैं सालों ने इन्हीं दोनों केंद्रों से गोरखपुर और आसपास के जिलों की सियासत को साधा जाता है। इन दोनों केंद्रों पर ही बड़े मसलों की पंचायत होती है। हालांकि बाद में गोरक्षनाथ मंदिर जहां हिंदुत्व का बड़ा केंद्र वहीं हाता, बहुजन समाज पार्टी का बड़ा सेंटर। यही कारण है कि हाता में पुलिस की छापेमारी के बाद मायावती ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और उनके कहने पर प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर विरोध प्रदर्शन के लिए गोरखपुर पहुंचें। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में ये सियासी लड़ाई और परवान चढ़ेगी।

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