बबलू हत्याकांड: परिजनों के आंसू पोछने के लिए जुट रहे ‘चेहरे’ तमाम लेकिन शूटरों का नहीं मिल रहा नामो निशान

वाराणसी। सदर तहसील में नितीश सिंह उर्फ बबलू की दुस्साहसिक तरीके से की गयी हत्या हाल फिलहाल में पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। सरेआम वारदात को अंजाम देने के बाद शूटर्स आराम से फरार हो जाते हैं लेकिन पुलिस एक हफ्ते बाद भी कोई अहम सुराग नहीं ढूंढ पाती है। ट्रांसपोर्ट और लेबर सप्लाई की ठेकेदारी करने वाले बबलू का समाजिक दायरा खासा बड़ा था और इससे जुड़े कारकों को लेकर कई लोग रजिश भी रखते थे। पिछले एक सप्ताह में कोई ऐसा दिन नहीं होगा जब शोक संवेदना व्यक्त करने के लिए बबलू के लोहिया नगर स्थित आवास पर सैैकड़ों लोग न पहुंचे हों लेकिन परिजनों के सुलगते सवालों का उत्तर किसी के पास नहीं है। खास यह कि जिन लोगों से बबलू की अदावत बतायी जाती थी वह भी आ ही नहीं रहे बल्कि घंटों मौजूदगी से खुद को पाकसाफ जताने की कोशिश भी कर रहे हैं।

पुलिस की जांच में नहीं नतीजा खास

बबलू को जिस अंदाज में सरेआम शूट किया गया वह पुलिस के इकबाल पर सवालिया निशान है। एडीजी बृज भूषण समेत तमाम आला अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदेश में गृह विभाग की कमान संभालने वाले प्रमुख सचिव ने भी इस बाबत जानकारी ली। बावजूद इसके अब तक पुलिस के हाथ ही नहीं खाली है बल्कि शूटरों का चिह्निकरण तो दूर कारण तक नहीं जान सकी है। फिलहाल खुलासे के गठित टीमों ने संदेह के दायरे में आने वालों समेत बबलू के करीबियों से लंबी पूछताछ की है। दर्जनों लोगों से पूछताछ के बावजूद पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।

सुरक्षा को लेकर परिजन परेशान

बबलू के बड़े पुत्र ऋषभ सिंह हाइकोर्ट में अधिवक्ता हैं और पिता की हत्या के बाद वह खासे सदमे में हैं। लाइसेंसी पिस्टल वारदात के बाद थाने में जमा हो चुका है। सुरक्षा को लेकर परिवार खासा सहमा है क्योंकि ऋषभ ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया था लेकिन सभी औपचारिकता पूरी होने के बावजूद फाइल अटकी है। वारदात के बाद थाने स्तर पर सुरक्षाकर्मी लग रहे हैं लेकिन वह आने वालों की निगरानी पर अधिक ध्यान देते हैं।

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