कुख्यात के जमानत का विरोध करने की तैयारी पड़ी बबलू को भारी! विरोधियों ने एक साथलिया निशाने पर

वाराणसी। सदर तहसील के भीतर दुस्साहसिक ढंग से प्रमुख ट्रांसपोर्टर और सोनभद्र में लेबर सप्लाई करने वाले नितीश सिंह बबलू का मंगलवार भोर में अंतिम संस्कार किया गया। इसमें बड़ी संख्या में फोर्स के अलावा सैकड़ों शुभेच्छुक शामिल थे। पोस्टमार्टम हाउस से लेकर घाट तक बबलू के करीबियों का मानना था कि कुख्यात अपराधी अजय-विजय की जमानत का विरोध करना भारी पड़ गया। दरअसल लंबे समय से जेल की सलाखों के पीछे निरुद्ध कुख्यात ने अपनी जमानत करा ली थी। चर्चाओं की माने तो एक ‘माननीय’ ने पर्दे के पीछे से इसका बंदोबस्त किया था। बावजूद इसके वह बेलबांड भर कर बाहर नहीं आया। दूसरी तरफ बबलू जमानत उपरी अदालत से निरस्त कराने के लिए जोर लगा रहे थे।

खास बोर की पिस्टल से चर्चाओं को मिला बल

गौरतलब है कि अजय-विजय नेकुछ चर्चित वारदात को अंजाम देने में .45 की पिस्टल का इस्तेमाल किया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद भी यह खास पिस्टल पुलिस के हाश नहीं लगी थी। माना जाता है कि कुख्यात ने इसे बड़ी वारदात के लिए महफूज स्थान पर रखवाया था। खास यह कि एक पखवारे की अवधि के दौरान ही कुख्यात पेशी पर वाराणसी कचहरी आया था। यहां पर उसने खास लोगों से मुलाकात की थी और जल्द बाहर आने का भरोसा दिलाया था। आरोप है कि अंतिम रणनीति तय करने के बाद कुख्यात लौट गया जिसके बाद बबलू की रेकी शुरू हो गयी।    

आभास तक नहीं था खतरे का

एक तरफ हत्या की साजिश तैयार हो चुकी थी तो दूूसरी तरफ बबलू को इसकी भनक तक नहीं थी। कुख्यात अपराधी ही नहीं बल्कि एक पूर्व ब्लाक प्रमुख का पुत्र भी विरोधी खेमे में था। इसके अलावा कुछ विवादित जमी नें जिनको लेकर विवाद चल रहा था बबलू ने एक पक्ष की तरफ से पैरवी की थी। यही कारण था कि वह हमेशा की तरह बेफिक्र होकर मुकदमे की तारिख पर गये थे जहां पहले से हमलावरों की खेप इंतजार कर रही थी। चौंकाने वाला तथ्य यह भी रहा कि वारदात के बाद दबी जुबान से जिन ‘माननीयों’ के संलिप्तता की आशंका जतायी जा रही थी वह पोस्टमार्टम हाउस से लेकर घाट तक साथ दिखे।  

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