गाजीपुर। आजादी के बाद से पिछले 70 वर्षों से न्यायपालिका न्याय देने का काम करती थी आज उसके वरिष्ठ चारों न्यायधीश जनता के बीच में आकर न्याय मांग रहे हैं। आज ऐसे लोग सत्ता में हैं जिन्होंने न्यायपालिका चुनाव आयोग, संसद, मीडिया, सीबीआई और ईजी जैसी तमाम संस्थाओं को अपने फायदे के लिए उनकी स्वतंत्रता को प्रभावित कर लोकतंत्र को समाप्त करने का प्रयास कर रहे हैं और उसमें बहुत हद तक कामयाबी हो रहे हैं। आखिर जब इंतहा हो गई तो सुप्रीम कोर्ट के चारों वरिष्ठ जज प्रेस के सामने आकर कह ही दिया कि सुप्रीम कोर्ट में भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और आज हम सब इसलिए यह बता रहे हैं की कल को कोई यह ना कह दे कि हमने भी अपनी अंतरात्मा बेच दी है। मायावती के 62 वें जन्मदिन पर लंका मैदान में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बसपा के जमानिया प्रभारी अतुल राय ने कहा कि ऐसी घटनाएं घटित होने से लोगों में आशा जगेगी चंद लोग ही सही लेकिन कुछ लोग तो हैं जो अपनी आवाज उठा रहे हैं। धन्य हैं वह लोग जिसे पता नहीं कि परिणाम क्या होगा फिर भी लगे हुए हैं ऐसी घटनाएं पहले भी हुई है। सोहराबुद्दीन एनकाउंटर में जज रोया सुनवाई कर रहे थे। इस मामले में सत्ता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुख्य आरोपी थे। जज की मौत हो जाती है सत्ता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बरी हो जाते हैं कोई सबूत नहीं है। दोनों में संबंध कायम करने के लिए मगर एक जज की मौत हो जाती है और उस पर सवाल भी ना हो पत्नी और बेटी को इतना डरा दिया जाए कि वह आज तक अपने प्यारे वतन में आकर सबके सामने बोलने का साहस नहीं जुटा सके क्या यही लोकतंत्र है?

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सुलगते सवालों को लेकर जनता गंभीर

अतुल राय ने अपनी बात को इस जोशीले अंदाज के साथ लोगों के सामने रखा कि वह इस पर सोचने को मजहूर हो गये। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बहन कुमारी मायावती जी का 62 वां जन्मदिन सोमवार को जनकल्याणकारी दिवस के रूप में लंका मैदान में 62 किलो का केक काटकर मनाया गया। आज सुबह से ही लंका मैदान में कार्यकतार्ओं का जमावड़ा शुरू हो गया था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर मंडल इंचार्ज विनोद कुमार बांगड़ी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बहन जी बाबा साहब से प्रेरणा लेकर दलित समाज के लिए घर परिवार छोड़कर आजीवन बहुजन समाज से जुट गयी और पूरा जीवन उनका समाज और पार्टी के लिए समर्पित किया।

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