जिस अतुल राय की मायावती-अखिलेश दे रहे थे ‘दुहाई’ उसकी अर्जी सुप्रीम कोर्ट ने सुनने ‘लायक’ भी नहीं पायी, फरारी में ही मतदान

मऊ। दो दिन पहले घोसी से गठबंधन के प्रत्याशी अतुल राय की खातिर बसपा सुप्रीमो मायावती ही नहीं बल्कि अखिलेश यादव जनता से दुहाई दे रहे थे। मामले को फर्जी करार देते हुए भाजपा की साजिश तक करार दिया था। उसी मामले में राहत के लिए अतुल राय ने देश की सर्वोर्च्च अदालत में गुहार लगायी। शुक्रवार को गिरफ्तारी से राहत की खातिर दायर अतुल राय याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का विचार से इन्‍कार कर दिया। कोर्ट का कहना था कि इस मामले में नियमित रूप से सुनवाई के लिए जो तिथि 27 मई निर्धारित है उसी पर अपनी बात रखे। दरअसल अतुल राय की तरफ से अधिवक्ताओं ने इस मामले में संलिप्तता न होने के प्रमाण दिये जाने की दलील दी लेकिन कोर्ट ने एक न सुनी। अब यह तय हो चुका है कि पोलिंग के दिन भी अतुल राय भागते रहेंगे और चुनाव की कमान उनके करीबियों के हाथ में ही रहेगी।

मंडरा रहा है कुर्की का खतरा

यूपी कालेज की एक पूर्व स्वजातीय छात्रा जो मूल रूप से बलिया की रहने वाली है ने अतुल राय पर संगीन आरोप लगाये थे। अतुल राय ने इसकी भनक मिलने पर पीड़िता के खिलाफ नरही थाने में मुकदमा कायम कराने का प्रयास किया। इससे पहले ही पीड़िता प्रदेश के डीजीपी से मिलकर न्याय की गुहार लगा चुकी थी। नतीजा, लंका थाने में अतुल के खिलाफ मुकदमा कायम होने के साथ कानूनी शिकंजा कसने लगा। कोर्ट ने आरोपों की गंभीरता और पीड़िता के मजिस्ट्रेट के समक्ष कलमबंद बयान के बाद एनबीडब्ल्यू जारी कर दिया। गिरफ्तारी से बचने के लिए अतुल भागते फिर रहे हैं लेकिन पुलिस की तीन टीमें गिरफ्तार नहीं कर सकी तो अब कोर्ट से फरार घोषित करा सम्पति कुर्क करने की प्रक्रिया आरम्भ हो चुकी है।

लंबे समय के बाद ऐसा चुनाव जिसमें प्रत्याशी फरार

मऊ के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के करीबी माने जाने वाले अतुल राय के खिलाफ पहले भी संगीन धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज थे लेकिन इस मामले ने उनकी मुश्किले बढ़ा दी है। मामला महिला अस्मिता से जुड़ा है जिसका खासा असर चुनाव पर भी पड़ रहा है। डैमेज कंट्रोल के लिए पीड़िता के खिलाफ मुकदमा कायम कराने के संग दूसरे जो भी दांव चले गये कारगर नहीं साबित होते दिख रहे हैं। रही सही कसर पीएम मोदी ने पूरी कर दी जिन्होंनेअतुल के बहाने पूरे गठबंधन पर सवाल उठा दिये।

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