वाराणसी। बसपा नेता अतुल राय की पिछले माह हुई गिरफ्तारी पुलिस के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। इस मामले में हाईकोर्ट ने एसएसपी वाराणसी और एसओ लंका को नोटिस जारी किया है। गिरफ्तारी के बाद रिमांड मजिस्ट्रेट की कोर्ट से ही अतुल राय को मुक्ति मिल गयी थी लेकिन अरेस्ट स्टे के बावजूद की गयी इस कार्रवाई पर हाईकोर्ट में अवमानना की याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट का आदेश मिलने के बाद पुलिस महकमे में खलबली मची है क्योंकि ‘दवाब’ के चलते यह कार्रवाई की गयी थी लेकिन अब सीधे हाईकोर्ट में जवाब देना होगा। मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 जनवरी की तिथि नियत की गयी है।

रिमांड मजिस्ट्रेट ने बिन्दुवार खारिज की थी पुलिस की थ्योरी

डाफी टोल प्लाजा पर कथित फायरिंग के छह माह बाद नौ दिसंबर को पुलिस ने अतुल राय को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद पहले सारनाथ और इसके बाद रामनगर थाने में रखा गया। अगले दिन रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी हुई जिसमें अतुल राय की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव हाईकोर्ट के अरेस्ट स्टे के साथ पुलिस की कहानी पर सवालिया निशान लगाये। पुलिस ने जो कहानी बनायी थी उसकी बिन्दुवार बखिया उधेड़ दी। लंबी बहस सुनने और साक्ष्यों को देखने के बाद रिमांड मजिस्ट्रेट ने अतुल राय रिमांड ही खारिज कर दिया था। साथ ही पुलिस की कार्रवाई पर सवालिया निशान लगाये थे।

गिरफ्तारी को बताया था विधायक सुशील का साजिश

अतुल राय ने अपनी गिरफ्तारी के पीछे भाजपा के बाहुबली विधायक सुशील सिंह की साजिश का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि सुशील के खिलाफ रंंगदारी का मुकदमा दर्ज कराया है जिसके चलते दबाव में यह कार्रवाई की गयी। कोर्ट में सवाल उठाये कि घटना के पांच माह से अधिक गुजरने के बाद भी चार्जशीट क्यों नहीं दाखिल की गई। उसके बाद फिर 17 दिसंबर को एसओ लंका अतुल राय को थाने पर बुला कर घंटों बैठाए रखे। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अरुण कुमार ने एसएसपी वाराणसी तथा एसओ लंका से इस मामले में जवाब मांगा है।

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