अंसारी परिवार की ‘तरफदारी’ तो नहीं पड़ी ओमप्रकाश को भारी! योगी ने कैबिनेट से बर्खास्त करने के संग दूसरे नेताओं पर गिरायी गॉज

लखनऊ। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओमप्रकाश राजभर पिछले लंबे समय से भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोले थे। प्रदेश में जिस सरकार के वह कैबिनेट मंत्री थे उसके मुखिया को भी खरी-खोटी सुनाने से नहीं चूकते थे। लोकसभा चुनावों में सीटों को लेकर उन्होंने जिस तरह तेवर अख्तियार किये थे वह पार्टी के शीर्ष नेताओं को खल गया था। गाली-गलौज भी बर्दाश्त की जाती लेकिन खुफिया रिपोर्ट मिली कि ओमप्रकाश ने अंसारी परिवार और उससे जुड़े अतुल राय को जिताने के लिए अपने वोटों को शिफ्ट करने की कोशिश की। इसके बाद सरकार एक्शन मोड में आ गयी। सोमवार की सुबह ही ओमप्रकाश को कैबिनेट से बर्खास्त करने की संस्तुति कर दी गयी। उनके संग पार्टी के जिन सात नेताओं को राज्यमंत्री का दर्जा देते हुए निगम में एडजस्ट किया गया था उन्हें भी पैदल कर दिया गया।

अब तक नहीं रहा किसी के संग साथ

राजनीति में ओमप्रकाश पिछले कुछ दशक से सक्रिय हैं। बिरादरी को लामबंद कर वह कुछ सीटों पर नुकसान तो पहुंचा सकते हैं लेकिन अपने दम पर जीतने की स्थिति में अब तक नहीं पहुंच पाये। पिछले लोकसभा चुनाव में वह एक तरफ तो कांग्रेस के हेलीकाप्टर से घूमे तो दूसरी तरफ अफजाल अंसारी के मोर्चे में बने रहे। इस चुनाव में भी उन्होंने सपा-बसपा गठबंधन से लेकर कांग्रेस तक से जुड़ कर मोर्चा बनाने की कोशिश पूरी की लेकिन पुराना ‘इतिहास’ देखते हुए किसी ने तवज्जो नहीं दी। खुद कैबिनेट मंत्री और बेटे समेत सात लोगों को राज्यमंत्री का दर्जा दिलाने पर भी उनकी मांग बढ़ती गयी जिसका परिणाम कार्रवाई के रूप में सामने आये।

अनिल राजभर की लाटरी लगी

सुभासपा के नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ सीएम योगी ने उनके विभागों को राज्यमंत्री अनिल राजभर को दे दिया है। भाजपा ने एक तीर से दो शिकार किये हैं। एक तरफ संदेश देने की कोशिश की वह राजभर बिरादरी के साथ है और दूसरी तरफ ओमप्रकाश का साथ छोड़ने पर ही कुछ विचार किया जा सकता है। माना जा रहा है कि सुभासपा के कुछ विधायक भी ओपी का साथ छोड़ सकते हैं। जिन निगमों व आयोगों के अध्यक्षो को बर्खास्त किया गया है उनमें पिछड़ा वर्ग आयोग सदस्य गंगाराम राजभर,पिछड़ा वर्ग आयोग सदस्य विरेंद्र राजभर, पशुधन विकास परिषद सदस्य सुदामा शामिल हैं। इनके संग ओपी राजभर के बेटे अरविंद राजभर जो सूक्ष्म-लघु उद्यम आयोग के अध्यक्ष थे वह भी बर्खास्त, बीज निगम अध्यक्ष राणा अजीत भी बर्खास्त, एकीकरण परिषद सदस्य सुनील अर्कवंशी और एकीकरण परिषद सदस्य राधिका पटेल बर्खास्त की गयी हैं।

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