गाजीपुर। बीएसपी सुप्रीमो मायावती के बाद अब पार्टी के दूसरे नेता भी अंसारी ब्रदर्स की ब्रांडिंग में लग गए हैं। मंचों से अंसारी ब्रदर्स का खूब बखान किया जा रहा है। जनता के बीच अंसारी ब्रदर्स को माफिया नहीं बल्कि मुसलामों और गरीबों का मसीहा के तौर पर पेश करने की कोशिश की जा रही है। मुहम्मदाबाद के शहीद पार्क में बीएसपी के जोनल कोऑर्डिनेटर मुनकाद अली ने भी अंसारी बंधुओं की की तारीफ में कसीदे पढ़े जिसे सुनकर कोई भी हैरान रह गया । उन्होंने कहा कि अंसारी बंधुओं को अपराधी कहना बेमानी है। मीडिया और सामतंवादी साजिश के तहत इन्हें माफिया और डॉन से नवाजते हैं।

और क्या कहा मुनकाद अली ने ?

मुनकाद अली ने कहा कि अंसारी ब्रदर्स का सपा ने अपमान किया लेकिन बसपा उन्हें सम्मान दे रही है। अंसारी बंधुओं के साथ आने से गाजीपुर की सभी सात सीटों सहित पूर्वांचल भर में बसपा जीत का परचम फहराएगी। उन्होंने कहा कि मायावती भी समांतवादी सोच के खिलाफ लड़ती रही हैं। इस काम में अब अंसारी ब्रदर्स साथ दे रहे हैं।

ब्रांडिंग के पीछे की असल वजह

बीएसपी बखूबी समझती है कि अगर अंसारी ब्रदर्स की ब्रांडिंग करने से पूर्वांचल में मुस्लिमों का एक बड़ा धड़ा उसके साथ आ सकता है। अंसारी ब्रदर्स का गाजीपुर, मऊ, वाराणसी और बलिया की दो दर्जन सीटो पर प्रभाव है। इन इलाकों में मुस्लिमों का एक बड़ा तबका उन्हें नेता मानता आया है। अगर बीएसपी ने अंसारी ब्रदर्स को तवज्जो दी तो मुस्लिमों को लेकर पार्टी की टेंशन दूर हो सकती है।

क्या है बीएसपी की असल मुश्किल ?

विधानसभा चुनाव में बीएसपी की सबसे बड़ी मुश्किल मुस्लिम मतदाता है। जानकार मान रहे हैं कि मुस्लिमों का एक बड़ा तबका अभी भी समाजवादी पार्टी के साथ है। मुलायम भले ही पार्टी में हाशिए पर चले गए हों लेकिन अखिलेश को लेकर मुस्लिम में विश्वास की किरण नजर आ रही है। यही नहीं जिस तरीके से अखिलेश ने बीजेपी से मोर्चा लेने के लिए कांग्रेस का साथ पकड़ा उससे भी मुस्लिम वोटर्स का विश्वास बढ़ा है। मायावती ये बखूबी जानती हैं कि अगर यूपी का रण जीतना है तो उन्हें मुस्लिमों में अपनी पैठ बनानी होगी। इसीलिए अब उन्होंने अंसारी ब्रदर्स की ब्रांडिंग का फैसला लिया है।

admin

No Comments

Leave a Comment