वाराणसी। लंबे समय से दलितों-वंचितों के लिए काम करने वाले मानवधिकार कार्यकर्ता डा. लेनिन रघुवंशी की नाम नोवल पुरस्कार के लिए भेजा गया है। कई संस्थाओं और शिक्षाविदो ने नोबल पुुरस्कार समिति से शांति के लिए दिये जाने वाले पुरस्कार के लिए डा. लेनिन के नाम की संस्तुति की है। गौरतलब है कि 2014 में इस श्रेणी के तहत कैलाश सत्यार्थी को यह पुरस्कार मिला था। कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार पा चुके डा. लेनिन को काशी की समावेसी और बहुलतावादी संस्कृति को अंतराष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित और प्रसारित करने के लिए यह पुरस्कार देने की सिफारिश की गयी है।

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पहले भी मिले है कई अहम पुरस्कार

डा. लेनिन भारत के एक दलित अधिकार कार्यकर्ता हैं जो पीपुल्स वीजिलेंस कम्यूनिटी आॅन ह्यूमन राइट्स (पीवीसीएचआर) के संस्थापक सदस्यों में से एक है। यह संस्था समाज के हाशिए पर रहने वालों के उत्थान के लिए काम करती है। उनके काम को ग्वांगजू ह्यूमन राइट्स अवार्ड (दक्षिण कोरिया), आचा पीस स्टार अवार्ड (यूएसए), वाइमर इंटरनेशल ह्यूमन राइट अवार्ड (जर्मनी), कर्मवीर पुरस्कार भारत, एनी थामस नेशनल ह्यूमन राइटेस अवार्ड तथा अशोका फेलोशिप (अमेरिका) पहले ही पुरस्कृत कर चुके हैं। इन दिनों भारत के छह विश्वविद्यालय और यूरोप के छह विश्वविद्यालय मिल कर जो शोध कर रहे हैं उसकी कोर कमेटी के सदस्य डा. लेनिन हैं। ग्लोवल इंडिया के तहत काम करने के दौरान स्पेन के विश्वविद्यालय ने उन्हें अतिथि प्रोफेसर के रूप काम करने का न्योता दिया है।

सत्यमेज जयते में दर्शायी गयी थी कहानी

कुछ समय पहले टेलीविजन पर आये फिल्मस्टार आमिर खान के चर्चित शो सत्यमेव जयते में डा. लेनिन पर एक एपीसोड था जो खासा चर्चा में रहा। पुरस्कार के लिए संस्तुति करने की पहल दिल्ली विश्वविद्यालय के समाज शास्त्र विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डा. अर्चना कौशिक ने की थी जिसमें अब लोग जुड़ते जा रहे है। महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय एचओडी सोशल वर्क्स डा. विजय शंकर सिंह, बीएचयू के प्रोफेसर अशोक कौल समेत कई अहम लोगों ने इसकी संस्तुति की है। लेनिन रघुवंशी की टीम में कबीर मठ मूलगादी के संत विवेक दास, श्रुति नागवंशी, मोहनलाल पांडा, हेलमा रिक्टर (जर्मनी) और पारल शर्मा (स्वीडन) भी शामिल हैं।

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