वाराणसी। बनारस में बीजेपी के कद्दावर नेता औरशहर दक्षिणी से सात बार के विधायक रहे  श्यामदेव राय चौधरी ‘दादा’ के साथ एक बार फिर से धोखा हुआ है। बीजेपी ने विधान परिषद सीटों के लिए उनका पत्ता काटते हुए अशोक धवन को अपना उम्मीदवार बनाया है। इस सूची के सामने आने के साथ ही वाराणसी की सियासत एक बार फिर से तेज हो गई है। पार्टी के इस फैसले से दादा नाराज हैं। उन्होंने इशारो-इशारों में पार्टी आलाकमान पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है।

 

अमित शाह ने किया था दादा से वादा !

 

विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी ने दादा का टिकट काट दिया था। उस वक्त दादा समर्थकों ने जबरदस्त हंगामा किया। पार्टी के फैसले से दादा भी नाराज हो गए थे। बताया जा रहा है कि उस वक्त अमित शाह ने उनसे विधान परिषद भेजने का वादा किया था। इस बात की पुष्टि दादा भी कर रहे हैं। मीडिया से बात करते हुए दादा ने बताया कि मुझे पार्टी से कोई गीला शिकवा नहीं है। अफसोस इतना है कि जब मुझे एमएलसी बनाना ही नहीं था तो अमित शाह ने क्यों वादा किया था। उन्होंने अपना वादा क्यों नहीं पूरा किया ये तो वही जाने।

सोशल मीडिया पर बहस तेज

दादा का टिकट कटने की खबर मिलते ही बनारस में सियासी पारा एक बार फिर से तेज हो गया। खासतौर पर सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हो गई। दादा समर्थक जहां इस फैसले से हैरान दिखे तो वहीं विरोधी फिर से चुटकी ले रहे हैं। किसी ने कहा कि अमित शाह ने दादा को फिर दिखाया ठेंगा तो कोई लिख रहा है कि दादा के चेले ने फिर दे दिया ‘दगा’ !

अशोक धवन को मिला ईनाम

बीजेपी ने अगर दादा पर अशोक धवन को तरजीह दी है तो इसके पीछे की वजह भी है। अशोक धवन की गिनती बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं में होती है। धवन पार्टी संगठन से लंबे समय से जुड़े हुए हैं। यही नहीं शहर के व्यापारियों में उनकी अच्छी पकड़ है। माना जा रहा है कि व्यापारी वर्ग को खुश करने के लिए पार्टी ने उनके नाम पर मुहर लगाई है। वे प्रदेश के कोषाध्यक्ष, व्यापार प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं।

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