वाराणसी। लोकसभा चुनाव से पहले सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सीएम अखिलेश यादव भाजपा पर हमलावर हो गये हैं। गोवर्धन पूजा के बहाने काशी आने पर उन्होंने जहां पार्टीजनों को एकजुट किया वहीं भाजपा पर निशाना साध। अखिलेश यादव ने किसानों के मुद्दे पर कहा हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा हनुमान चालीसा पढ़ दो बंदर भाग जाएंगे। सोचो हम और आप धर्म के बारे में थोड़ा बहुत जानते हैं तो कभी-कभी हम अपने हनुमान जी का रूप उसी बंदर में देखते हैं। अगर हनुमान चालीसा पढ़ोगे तो बंदर भाग लेंगे नहीं आपके पास आ जाएंगे हनुमान चालीसा सुनकर के कोई हमें बुला रहा है। हम अपने किसान के हालत पर क्यों ना बोले गन्ना किसानों ने कहा हमारी कीमत नहीं मिल रही है। उन्होंने कहा ज्यादा गन्ना मत पैदा करो चीनी से डायबिटीज हो रही है सोचो कैसे हैं यह लोग।

आजादी के बाद पहली बार बैंक घाटे में

पूर्व सीएम ने नोटबंदी की याद दिलाते हुए कहा कि आज 8 तारीख है। पहले हमारा आपका सारा पैसा सब बैंकों में जमा हो गया। आज वही बैंक जबरदस्त घाटे में क्यों चली गई। कौन सा कारण था कि बैंक घाटे में चली गई। आजादी के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि हमारी बैंक घाटे में है हो सकता है। ऐसी मंदिर है कि बैंक कह दे जो पैसा आपने जमा किया वह आपके नहीं है अब तो बैंकों का हो गया। अगर थाने में कोई सिपाही भी है तो कहते तो देख लो यह यादव की सरकार है। आज तो लोग पैसा लेकर भागे जा रहे हैं हजारों करोड़ पैसा लेकर चले गए लोग बैंकों का पैसा उनका पैसा नहीं था वह आपका पैसा था। जो हजारों करोड़ चला गया न जाने कितने लोग कहां कितनी दूर चले गए अगर कोई थाने में एक या दो यादव का रिश्तेदार है हमारा रिश्तेदार है जो भागने वाले लोग हैं उनके नाम के पीछे भी कुछ लगा है।

सम्मान छीनने की रची जा रही साजिश

अब यह कैसा उत्तर प्रदेश बन गया। जिस प्रदेश ने सबसे ज्यादा लोकसभा के सांसद भेजे हैं और क्या मिला आपको हमें और आपको। थोड़ा बहुत सम्मान और कानून का सहारा मिल जाता था। यह केवल मैं अपने आपको नहीं बता रहा हूं। हमारे जैसे जितने लोग हैं हमको थोड़ा बहुत सम्मान मिल जाता था लेकिन ऐसी साजिश रची है कि इस सम्मान को छीनने का काम किया है। अगर हम और आप जागे नहीं हम और आप लोग अगर कृष्ण भगवान की तरह गोवर्धन नहीं उठाया जो लोग हमें धोखा दे रहे हैं फिर धोखा देंगे। इतना बेरोजगार दुनिया में कहीं नहीं है जितने अपने देश में बेरोजगार हैं। हमें आपको सोचना होगा कभी-कभी मन करता है किस तरफ जाएं। क्या रास्ता निकलेगा जो धर्म को मानने वाले भी धर्म नहीं मानते वह केवल ढोंग कर रहे हैं।

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