दो दशक बाद पूर्व सांसद कैलाशनाथ यादव की होगी ‘घर वापसी’, पूर्वांचल में बसपा को लगा करारा झटका

वाराणसी। लोकसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन कर बसपा ने भले ही 10 सीटे हासिल कर ली हो लेकिन इसके बाद से पार्टी में सब कुछ ‘ठीक’ नहीं चल रहा है। पूर्वांचल में कई जिलों में असर रखने वाले दिग्गज नेता एक के बाद एक कर पार्टी छोड़ते जा रहे हैं। इसी क्रम में मायावती की सरकार में कैबिनेट मंत्री और चंदौली से सांसद रह चुके कैलाश नाथ सिंह यादव ने मंगलवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। फिलहाल उन्होंने पत्ते नहीं खोले हैं लेकिन उनके सपा में जाने के आसार जताये जा रहे हैं। लगभग दो दशख के बाद पूर्व सांसद की यब सपा में वापसी होगी।

बेटा रह चुका है सोनभद्र से विधायक

गौरतलब है कि कैलाशनाथ यादव का नाम दो दशक पहले उस समय सुर्खियों में आया था जब सूबे के तत्कालीन मुख्यमंत्री हेलीकाप्टर से उनके गांव एक वैवाहिक समारोह में शमिल होने के लिए आये थे। उन्हें प्रदेश स्तर का पदाधिकारी भी बनाया गया था लेकिन कुछ दिनों के बाद उन्होंने सपा को छोड़कर बसपा का साथ पकड़ लिया। सैदपुर से विधानसभा का चुनाव जीतने के बाद उन्हें सीधे कैबिनेट मंत्री बनाया गया। उसके बाद चंदौली से वह सांसद हुए जबकि बेटा सोनभद्र से विधायक रह चुका है। कैलाशनाथ यादव से पहले पूर्व विधायक टी राम भी बसपा को अलविदा कह चुके हैं।

पार्टी को लेकर लगाये गंभीर आरोप

जोनल कोआर्डिनेटर को भेजे पत्र में पूर्व सांसद का कहना है कि इधर कई वर्षों में पूर्वांचल में गुटबंदी हावी हो रही थी। इसके चलते संगठन में काफी गिरावट आने लगी। पार्टी के संस्थापक कांशीराम के विचारों के अनुसार काम करने के बदले दूसरी संस्कृति हावी होती जा रही है। प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर इसकी सूचना पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती, जोनल प्रभारी को भेजी है।

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