वाराणसी। सरकार ने प्रदेश की सभी जेलों में निरुद्ध अलग-अलग गिरोहों से जुड़े गुर्गो को एक बैरक में न रखने का आदेश काफी पहले दिया था। इसे जेल अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही माने या आदेश की अवहेलना लेकिन क्रियान्वन सही ढंग से नहीं हुआ था। बागपत जेल में माफिया मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद शासन ने एक बार फिर से आदेश को भेजते हुए रिपोर्ट मांगी है। सेन्ट्रल जेल के वरिष्ठ अधीक्षक अंबरीष गौड ने स्वीकार किया कि जेल की बैरकों में निरुद्ध कैदियों और बंदियों की पड़ताल की जा रही है। दूसरे गुटों का होने पर उन्हें अलग बैरक में रखा जायेगा। आदेश पुराना था लेकिन इस बारदात के बाद फिर से सभी जेलों को भेज क रिपोर्ट मांगी गयी है।

सभी जेलों में हैं अलग गुटों के सदस्य

पूर्वांचल ही नहीं प्रदेश की सभी जेलों का कमोवेश यही हाल है। डॉन से लेकर कुख्यात अपराधी के गिरोहों से जुड़े गुर्गे बैरकों में निरुद्ध हैं। कई तो जेल की सलाखों के पीछे से गिरोह संचालित करते हैं लिहाजा वह करीबियों को साथ रखते हैं। पहले भी गुटों के बीच हिंसक भिडंत हो चुकी है लेकिन इस वारदात के बाद नये सिरे से छंटनी कर दूरस्थ जेलों में भेजने की तैयारी चल रही है।

कमेठी से पहले एक्शन में कारागार महकमा

सीएम योगी ने मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद जेलों की दशा और दिशा सुधारने के लिए पूर्वा डीजीपी सुलखान सिंह के नेतृत्व में कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी का काम भले न शुरू हुआ तो लेकिन कारागार महकमा एक्शन में आ चुका है। इसका नतीजा है कि प्रदेश की जेलों में काफी समय से लंबित कामों को आनन-फानन में वित्तीय मंजूरी दे दी गयी है। नयी बैरक के निर्माण से लेकर चहारदिवारी उंची करने तक पर ध्यान दिया जा रहा है। अलबत्ता बजरंगी की हत्या के मामले के आरोपित सुनील राठी को बागपत से लखनऊ लाने की तैयारी चल रही है।

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