आजमगढ़। पिछले लोकसभा चुनाव में सपा के संरक्षक और दिग्गज राजनेता मुलायम सिंह यादव ने चुनाव लड़ने की घोषणा कर सबको चौंका दिया था। राजनीति में चरखा दांव के लिए विख्यात मुलायम का मुकबला बाहुबली रमाकांत से था। यादवों के घमासान में भले जीत मुलायम की हुई लेकिन इस सीट को खाली करने का हौसला वह नहीं जुटा सके। जीती दूसरी सीट मैनपुरी को उन्होंने भले छोड़ दिया लेकिन अब भी यहीं से सांसद बने हैं। एक दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मुलायम के मैनपुरी से लड़ने का एलान कर सियासी घमासान तेज कर दिया है। दरअसल रमाकांत पिछले कुछ दिनों से भाजपा के खिलाफ जिस तरह बयानबाजी तक रहे थे उससे उनके सपा में जाने की अटकले लग रही थी। पेंच फंसा है तो पुराने दिग्गज बलराम यादव को लेकर।

सवर्ण और ओबीसी को लेकर जारी कशमकश

रमाकांत यादव को पूरा विश्वास है कि मुलायम सरीखे दिग्गज से सामना न हो तो यादव वोट उन्हें मिलेगा ही। भाजपा के टिकट पर रहने से सवर्ण और ओबीसी की दूसरी जातियां साथ दे सकती है। दूसरे किसी पार्टी से रहने ेपर सत्ताधारी दल के कोप का शिकार होना पड़ सकता है। यही कारण है कि वह खुल कर अपने पत्ते नहीं दिखा रहे हैं। दूसरी तरफ सपा में उनका विरोधी खेमा खासा मजबूत है जो आसानी से पार्टी में आने नहीं देगा। आ भी गये तो चुनाव में भितरघात तय है।

पुराने और निष्ठावान रहे हैं बलराम

दूसरी तरफ सपा टिकट के लिए मजबूत दावेदारी बलराम यादव की रही है जो मुलायम के संसदीय क्षेत्र पर पूरे कार्यकाल के दौरान ध्यान दिये रहे। बलराम यादव की निष्ठा पार्टी के विपरीत समय में डिगी नहीं जिससे उनका दावा अधिक मजबूत है। अखिलेश ने अपने मंत्रिमंडल में अहम स्थान देकर उन पर विश्वास बनाये रखा था। देखना है कि ऊंट किस करवट बैठता है क्योंकि विवाद की स्थिति में सीट गठबंधन के अहम घटक बसपा को भी जा सकती है।

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