भांप कर चुनावी समर में फिर से ललितेश की इंट्री अनुप्रिया ने यह यह डिमांड रखी! पिछली बार तो जमानत नहीं थी बची

मीरजापुर। कांग्रेस की दूसरी सूची बुधवार की रात जारी हुई है जिसमें काशी के त्रिपाठी घराने की चौथी पीढ़ी के ललितेशपति त्रिपाठी प्रत्याशी बनाये गये हैं। सूची भले अब जारी हुई लेकिन इसका आभास मौजदू सांसद और केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल को पहले से था। अपना दल की मुखिया अनुप्रिया ने इसे भांपते हुए भाजपा के नेतृत्व से वाराणसी के विधायक और प्रदेश सरकार के मंत्री डा. नीलकंठ तिवारी को यहां का प्रभारी बनाने का अनुरोध किया था। सवा दो लाख वोट से पिछला चुनाव जीतने वाली अनुप्रिया ने गठबंधन के प्रत्याशी राजेन्द्र एस बिंद को गंभीरता ले नहीं लिया है। राजेन्द्र मुंबई के उद्योगपति हैं और लोग जानते हैं कि चुनाव में जीत या हार के बाद उनसे मिलना मुश्किल रहेगा। जतिगत से लेकर दूसरे समीकरणों के चलते कांग्रेस प्रत्याशी अधिक चुनौती रहेंगे।

विधायकी के बाद थी किस्मत आजमाई

गौरतलब है कि पं. कमलापति त्रिपाठी के प्रपौत्र ललितेशपति 2012 में मडिहान से पहली बार विधायक चुने गये थे। इसके दो साल बाद उन्होंने संसदीय चुनाव में दावेदारी की। गांधी परिवार का करीबी होने के चलते टिकट भी मिला लेकिन वह अपनी जमानत भी नहीं बचा पाये थे। अनुप्रिया ने चार लाख 36 हजार 536 वोट पाकर निकटतम प्रतिद्वंदी बसपा की समुद्रा बिंद को परजित किया था। समुद्रा को दो लाख 17 हजार 457 वोट मिले थे और जमानत बच गयी लेकिन सपा प्रत्याशी भी ललितेश की तरह इसे गंवा बैठे।

भाजपा की गुटबाजी को लगेगा विराम

दरअसल केन्द्रीय मंत्री इस समय विपक्षी दलों से अधिक केन्द्र और प्रदेश की सत्ता में सहयोगी भाजपा से परेशान हैं। भाजपा के चारों विधायक उनके कार्यक्रमों का सार्वजनिक रूप से बहिष्कार करते हैं। माना जा रहा है कि इसी खातिर अनुप्रिया ने पीएम मोदी के क्षेत्र से और सीएम योगी की गुडलिस्ट में शामिल नीलकंठ तिवारी को अपने यहां प्रभारी बनवाया है। एक तरफ भाजपा की गुटबाजी को विराम लगेगा तो दूसरी तरफ काशी में बनने वाली ललितेश की चुनावी रणनीति की काट भी तैयार होगी। ललितेश पिछला विधानसभा चुनाव भी भाजपा के रमाशंकर पटेल से हार चुके हैं और लगातार तीसरी पराजय उनके लिए ठीक नहीं रहेगी।

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