वाराणसी। जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, यूपी में सियासी समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं। विपक्ष लामबंद हो रहा है तो बीजेपी की सहयोगी पार्टियां उसे आंखें दिखा रही है। कुल मिलाकर दबाव की राजनीति चरम पर है। इन सबके बीच बीजेपी की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी नई मुसीबत में फंस गई है। भ्रष्टाचार को लेकर योगी सरकार पर हमलावर होने वाली इस पार्टी अब खुद घपले-घोटालों से घिर गए हैं। वाराणसी के अजगरा विधानसभा से विधायक कैलाश सोनकर के बाद अब गाजीपुर के जखनियां से विधायक त्रिवेणी राम चार भी मुश्किल में फंसते दिख रहे हैं। आरोप है कि त्रिवेणी राम ने ग्राम प्रधान रहते हुए 56 लाख रुपए का घोटाला किया। अब इस मामले की जांच फिर से शुरू हो रही है।

मुश्किल में विधायक त्रिवेणी राम

गाजीपुर के जखनियां से विधायक के खिलाफ घोटाले के एक पुराने मामले की फाइल दोबारा खुलेगी। इस आशय का आदेश हाईकोर्ट ने डीएम गाजीपुर को दिया है। मामलामुहम्मदाबाद ब्लाक की करमचंदपुर ग्राम पंचायत का है। यह त्रिवेणी राम की पैतृक ग्राम पंचायत है और विधायक चुने जाने से पहले त्रिवेणी राम वहां के प्रधान थे। लगातार चार बार से वह प्रधान चुने जाते रहे। उस कार्यावधि में विभिन्न योजनाओं में लाखों रुपये के घोटाले के आरोप लगे। ग्राम पंचायत के ही राजीव रंजन सिंह ने इसकी शिकायत ऊपर तक पहुंचाई। तब वर्ष 2014 में तत्तकालीन डीएम ने इसकी जांच का आदेश दिया। जांच की जिम्मेदारी तत्कालीन डीडीओ सुरेशचंद्र राय को सौंपी गई। बताया जाता है कि जांच की शुरुआत में ही 56 लाख रुपये के घोटाले की पुष्टि हुई। यह घोटाला मनरेगा, शौचालय, व आवास योजना में हुआ बताया गया। आगे की कार्रवाई होती उसके पहले ही त्रिवेणी रामजखनियां विधायक निर्वाचित हुए। फिर तो उनके खिलाफ की फाइल बंद हो गई। आखिर में शिकायतकर्ता राजीव रंजन सिंह इस मामले को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे। जहां हाईकोर्ट ने डीएम गाजीपुर को आदेशित किया कि जांच की कार्रवाई शीघ्र पूरी की जाए। इस संबंध में डीएम के बालाजी ने बताया कि हाईकोर्ट ने दो माह के भीतर जांच प्रक्रिया पूरी करने काआदेश दिया है। इस आदेश का अनुपालन होगा।

विधायक ने आरोपों से किया किनारा

 उधर जखनियां विधायक त्रिवेणी राम ने कहा कि वह सभी आरोप राजनीतिक द्वेष के तहत लगे हैं। वह खुद चाहते हैं कि इस पूरे मामले की जांच हो। पूर्व के जांच अधिकारी तत्कालीन डीडीओ सुरेशचंद्र राय ने उन्हें जानबूझ कर फंसाया था। रही बात उनके खिलाफ शिकायत करने वाले राजीव रंजन सिंह की तो वह उनसे पांच बार ग्राम प्रधानी का चुनावहार चुके हैं। लिहाजा इसी खुन्नस में उन्होंने उनके खिलाफ झूठी शिकायतें की।

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