वाराणसी। लालपुर पुलिस चौकी से कुछ दूरी पर मिली मीरा जायसवाल की क्षत-विक्षत लाश कैैंट पुलिस के लिए बड़ी चुनौती थी। मामला महिला का होने के नाते डीजीपी मुख्यालय से लेकर स्थानीय अधिकारी तक घंटो पर प्रगति पूछ रहे थे। इंस्पेक्टर कैंट राजीव रंजन उपाध्याय के नेतृत्व में पुलिस ने महज 48 घंटों के भीतर जो चंौकाने वाला खुलासा किया किया उससे सभी सकते में रह गये। दरअसल लल्लापुरा-औरंगाबाद (सिगरा) निवासिनी मीरा जायसवाल को क्रूरतापूर्वक मौत के घाट उतारने वाला कोई और नहीं बल्कि उसका बेटा अमित था। अमित ने अपने दो अन्य दोस्तों के संग मिल कर वारदात को अंजाम दिया था। एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने शनिवार को मीडिया के सामने गिरफ्तार आरोपितों को पेश किया तो उन्होंने अपना गुनाह कबूल करते हुए वारदात को लेकर पूरी कहानी बतायी। एसएसपी ने कैंट इंस्पेक्टर और उनकी टीम को 15 हजार रुपये पुरस्कार देने के संग घोषणा कि आईजी रेंज और एडीजी जोन को इस टीम को पुरस्कृत करने की संस्तुति की जाएगी।

‘तानाशाही’ रवैये था आजिज, पिता गये भाग

अमित का कहना था कि उसकी मां हमेशा विवाद करती थी और स्टाफ नहीं घरवालों के संग भी किसी तानाशाह की तरह बर्ताव करती थी। दशा यह थी कि किसी से मोबाइल पर बात करने पर स्पीकर आन कर सुनाने का आदेश फरमा देती थी। पिता अनिल इन्ही हरकतों के चलते घर छोड़कर भाग गये। नानी, बहन सेत दूसरे रिश्तेदारों ने नाता तोड़ लिया। दो माह पहले उसका विवाह हुआ लेकिन पत्नी अंकिता इन्ही हरकतों से परेशान होकर मायके चली गई। मैने घर पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की दुकान खोली तो मां मुझसे भी नौकरों जैसे बर्ताव करती थी। दिन-दिन भर गिड़गिड़ाने पर 100-50 जैसी रकम देती थी। इन वजहों से वह मानसिक रूप से परेशान रहने लगा और मां को रास्ते से हटाने की प्लानिंग बनायी। इसमें दुकान के एकाउंटेंट धीरू ने अपने मित्र शिवम सिंह से भेंट करायी।

कू्ररता बनी खुलासे का सबब

मीरा को जिस तरह मारा गया और विरोध नहीं हुआ इस पर पुलिस का शक गहराया और करीबियों से कड़ाई से पूछताछ की। इसमे अमित टूट गया और पूरी कहानी बतायी। मीरा को 17 सितंंबर की रात दूध में नींद की 15 गोली देकर बेहोश कर दिया गया। इसके बाद करेंट लगा कर चेक किया कि होश में तो नहीं। फिर चाकुओं से वार कर शरीर को छलनी कर दिया। अमित ने इससे पहले टीन का बक्सा 12 सौ रुपए में खरीद कर लाया था मां की लाश को रखकर मोपेड से छोटा लालपुर के सामने पश्चिम की ओर गड़ही में बांस की कोठी में फेंक दिया। इसके बाद वापस आया फिर घर आकर खून से सने सारे बिस्तर तथा घर में लगे 15 सीसी टीवी कैमरे के डीवीआर को फॉर्मेट कर पटक पटक कर तोड़ दिया ताकि किसी प्रकार का कोई साक्ष्य न मिल सके और खून से सने बोरे को सोनिया स्थित कूड़ेदान में फेंक दिया।

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