वाराणसी। देवरिया और मुजफ्फरपुर संवासिनी गृह में लड़कियों के साथ यौन शोषण की खबर के बाद एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अबकि बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी और मिर्जापुर के बाल शिशु गृहों से 24 बच्चे गायब होने की खबर सामने आई है। केंद्रीय महिला बाल विकास मंत्रालय दोनों ही जिलों के डीएम को पत्र लिखकर मामले की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही घटना की पूरी रिपोर्ट तलब की है।

निरीक्षण के दौरान गायब मिले बच्चे

दरअसल केंद्रीय महिला बाल विकास मंत्रालय की एक टीम पिछले 15 अप्रैल को वाराणसी के लक्ष्मी शिशु गृह का निरीक्षण करने पहुंची थी। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को मिले ब्यौरे के अनुसार लक्ष्मी शिशु गृह में 3 वर्षों 15 बच्चों को लाया गया लेकिन इस दौरान कोई अडॉप्शन नहीं हुआ। लेकिन जब टीम ने निरीक्षण किया तो वहां सिर्फ 8 ही बच्चे मौजूद थे। बाकि के सात बच्चों का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं था। ना ही इन बच्चों को अडॉप्ट किया गया था और ना ही शेल्टर होम में पाए गए। इसी तरह मीरजापुर के महादेव शिशु गृह ने दिखाया कि वहां 38 बच्चे एडमिट हुए, जबकि इस दौरान 15 बच्चों को अडॉप्ट किया गया। निरीक्षण के दौरान यहां 6 बच्चे मौजूद मिले। जबकि बाकी 17 बच्चों के बारे में न तो कोई ब्यौरा मिला है और न ही वे शिशु गृह में पाए गए।

मंत्रालय ने डीएम से किया जबाव तलब

घटना के बाबत केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से अडिशनल सेक्रटरी अजय तिरके ने यूपी की  बाल विकास विभाग की चीफ सेक्रटरी रेणुका कुमार को 21 अगस्त को एक पत्र लिखा। इसके बाद हरकत में आए अधिकारियों ने जांच के आदेश दे दिए हैं। हालांकि इस बाबत स्थानीय अधिकारियों ने चुप्पी साध ली है। डीएम सुरेंद्र सिंह प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहे हैं तो जिला प्रबोशन अधिकारी का फोन स्वीच ऑफ जा रहा है।

अधिकारियों पर लगा घूस मांगने का आरोप

वहीं लक्ष्मी शिशु गृह से जुड़े सदस्यों के मुताबिक उनके पास सभी 15 बच्चों के रिकॉर्ड मौजूद हैं। गायब हुए सात बच्चों में पांच की मौत हो चुकी है जबकि दो बच्चे का अडॉप्शन हुआ है। शिशु गृह के सदस्यों के मुताबिक निरीक्षण के दौरान गैरमौजूद बच्चों का रिकॉर्ड उन्होंने मंत्रालय की साइट पर नहीं अपलोड कर किया था, इस वजह से कन्फ्यूजन की स्थिति है। सदस्यों का ये भी आरोप था कि फरवरी महीने में उनकी संस्था को अनुदान मिलने वाला था, इसके एवज में राज्य महिला बाल विकास मंत्रालय के अधिकारी उससे घूस की मांग कर रहे थे। जब उन्होंने घूस की रकम नहीं दी तो उनकी संस्था को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया और तरह-तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।

admin

No Comments

Leave a Comment