अनुप्रिया के बाद आशीष का भी पत्ता ‘साफ’, रमाशंकर की तो लग गयी ‘लाटरी’

मीरजापुर। अपना दल के संस्थापक स्व. डा. सोनेलाल पटेल खुद को कभी चुनाव जीत नहीं सके लेकिन कमेरा समाज को संंगठित कर दूसरे दलों के लिए बड़ी चुनौती जरूर बन गये थे। उनकी मौत के बाद बेटी अनुप्रिया पटेल ने राजनीति के मैदान से लेकर घरेलू मोर्चे पर जो भी ‘दांव’ चले वह सफल होते दिखे। पहली बार विधायक चुने जान ेके दो साल बाद न सिर्फ सांसद बनी बल्कि पिछली मोदी सरकार में अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। प्रदेश के विधानसभा चुनावों में भी उनका पासा सही बैठा और कांग्रेस से अधिक सीटें जीतने में सफल रही। इस बार लोकसभा चुनाव से सितारे गर्दिश में दिख रहे हंै।

अचानक क्या हो गयी बात

बताया जाता है कि लोकसभा चुनावों के समय भाजपा पर दबाव बनाने के क्रम में अनुप्रिया और उनके पति आशीष पटेल की प्रियंका गांधी से हुई थी। यह बात दीगर है कि समझौता अंतत: भाजपा के साथ हुआ और मां के संग बहन पल्लवी पूरे चुनाव में प्रियंका के आगे-पीछे डोलती रही। बावजूद इसके केन्द्रीय मंत्रिमंडल में अनुप्रिया को स्थान नहीं मिला। यही नहीं मत्रिमंडल विस्तार में उनके पति आशीष को स्थान दिये जाने की चर्चा रही लेकिन मडिहान के विधायक रमाशंकर पटेल को राज्यमंत्री बना दिया गया। रमाशंकर भले पहली बार विधायक बने हो लेकिन जमीनी नेता हैं और बिरादरी में पकड़ कहीं से कमजोर नहीं है।

डैमेज कंट्रोल काम नहीं आया

जम्मू-कश्मीर पर लोकसभा में चर्चा के दौरान अनुप्रिया ने तेवर दिखाते हुए कांग्रेस को जमकर खरी-खोटी सुनाने के साथ सरदार पटेल को अपमानित करने तक का आरोप लगाया था। भाजपाइयों ने इस पर जमकर तालियां बजायी और मेज थपथपा कर शाबासी भी दी। बावजूद इसके प्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार में स्थान न मिलने पर अपना दल के समर्थक खासे मायूस हैं। खुन्नस इससे भी हैै कि बिरादरी के दूसरे नेता को उनके क्षेत्र में भाजपा प्रमोट कर रही है।

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