वाराणसी। पूर्व एमएलसी श्यामनारायण उर्फ विनीत सिंह के भाजपा में शामिल होने की अफवाहों को विराम भले लग गया हो लेकिन इनके पीछे जो थे वह समूचे घटनाक्रम को लेकर अब भी परेशान हैं। दरअसल बैधा गांव (मीरजापुर) में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह के पिता के त्रियोदशाह कार्यक्रम में विनीत के पहुंचने से पहले विरोधी खेमा सक्रिय हो चुका था। सुबह से अफवाहों का सिलसिलेवार दौर चला। पहले तो शाम को प्रदश अध्यक्ष डा. महेन्द्रनाथ पाण्डेय के कार्यक्रम में विनीत को शामिल होने की अफवाह फैलायी गयी और तेरवीं के कार्यक्रम में भगवा गमछे की फोटो वायरल की गयी। रही सही कसर सीएम से मुलाकात के बाद पूरी हो गयी। माना जा रहा है कि विरोधी खेमा किसी कीमत पर उनके पार्टी में शामिल होने के पक्ष में नहीं है जिसे लेकर वह पहले से सक्रिय हैै। दूसरी तरफ अरुण सिंह के पीएम मोदी से लेकर सीएम योगी से करीबी रिश्ते हैं जिससे खुल कर बोलने की स्थिति नहीं है। सम्भवत: यही कारण था कि प्रदेश अध्यक्ष ज्वानिंग के संबध में पूछे गये सवालों को लेकर असहज मुद्रा में रहे।
कई जिलों में लोकप्रियता को लेकर विरोधी खेमा दबाव में
विनीत के पार्टी में शामिल करने का विरोध करने वालों को लगता है कि पार्टी में एक प्रभावशाली क्षत्रिय नेता के आने से उनकी अहमियत कम हो जायेगी। मीरजापुर-सोनभद्र से वह एमएलसी रहे हैं और पत्नी दूरी बार जिला पंचायत मीरजापुर की अध्यक्ष हैं। चंदौली से चुनाव लड़ने पर 65 हजार से अधिक वोट पाने के बावजूद नजदीकी मुकाबले में हार हुई। पूर्वांचल नहीं प्रदेश में अधिकांश सीटोंं पर बसपा का पिछली बार की तुलना में वोट कम हुआ जबकि सैयदराजा में 25 हजार बढ़ गया। वाराणसी के संंग भदोही, जौनपुर और गाजीपुर में बड़ी संख्या में समर्थक हैं। इन कारणों से विरोधी गुट प्रयास कर रहा है कि पार्टी में उनकी इंट्री न हो।

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