बलिया। देश से पहले स्वतंत्र होने वाली इस धरती ने कई सपूत दिये हैं लेकिन मूल रूप से सिताब-दियारा के रहने वाले हैं हरिवंश नारायण सिंह की कहानी कुछ अलग है। हरिवंश को अधिकांश लोग वरिष्ठ पत्रकार के रूप में जानते हैैं लेकिन उन्होंने कैरियर की शुरूआत बैंक में राजभाषा अधिकारी के रूप में की थी। रविवार मैगजीन से पत्रकारिता की शुरूआत करने 1989 में प्रभात खबर अखबार से जुड़े और काफी समय तक प्रभात खबर के प्रधान संपादक रहे। सम्पूर्ण क्रांति का नारा देन वाले जेपी और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के भी बेहद करीबी रह चुके हरिवंश नारायण सिंह बाद में बिहार से सीएम नितीश कुमार से जुड़े तो उन्होंने पत्रकारिता को अलबिदा कह दिया। जेडीयू कोटे से 2014 में राज्यसभा सांसद बनने के बाद उन्होंने राज्यसभा के उपसभापति सरीखे प्रतिष्ठित पद पर विपक्ष के उम्मीद्वार को पराजित कर जीत हासिल की।

कांग्रेस ही नहीं महागठबंधन को करारा झटका

इस प्रतिष्ठापरक चुनाव में सिर्फ कांग्रेस ही नहींं बल्कि विपक्षी एकता का दंभ भरने वालों को कराराझटका लगा है। हरिवंश को एनडीए के मतो से ज्यादा वोट मिले हैं जो कुशल रणनीति का नतीजा रही। उन्हें 125 वोट मिले जबकि कांग्रेस की ओर से पार्टी के पूर्व महासचिव बीके हरिप्रसाद उम्मीदवार थे जिन्हें 105 वोट मिले हैं। भाजपा और मोदी का मुखर विरोध करने वाली आप से लेकर दूसरे दलों का वोट तक कांग्रेस नहीं ले सकी। कांग्रेस दशकों तक इस सीट को अपना मानती थी लेकिन इस चुनाव ने दर्शा दिया कि आगामी लोकसभा चुनाव में एकता के जो भी दावे किये जाये लेकिन जमीनी मुकाबले में सभी दल एक-दूसरे की टांग खींचने से बाज आने वाले नहीं हैैं।

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