वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने के नाते वाराणसी की अहमियत इन दिनों खास है। चाहे केंद्र सरकार हो या फिर राज्य सरकार, वाराणसी के विकास में कोई भी कोताही बर्दाश्त नहीं करता। जनता की सहूलियतों के लिए यहां पर बकायदा ‘मिनी पीएमओ’  के नाम से मशहूर प्रधानमंत्री का संसदीय कार्यालय बनाया गया है। शहर के विकास से जुड़ी एक-एक योजना पर खुद प्रधानमंत्री और केंद्र के तेज-तर्रार अफसरों की सीधी नजर रहती है। बावजूद इसके वाराणसी में विकास कार्यों में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। आरोपों के घेरे में कोई और नहीं बल्कि जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। सपा से बीजेपी का दामन थामने वाली जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर के खिलाफ आरोप है कि उनके कार्यकाल में हुए विकास कार्यों में भारी अनियमितता बरती गई है। बगैर कार्ययोजना बनाए और टेंडर निकाले भुगतान कर दिया गया। जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर और अपर मुख्य अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर से तीन दिनों के अंदर ही 4 करोड़ 30 लाख रुपए अवमुक्त कर दिए गए जो नियमों के खिलाफ है।

सवालों के घेरे में जिला पंचायत अध्यक्ष

वाराणसी जिला पंचायत में ऐसे ही कई मामले हैं जिसने पूरे सिस्टम को सवालों के घेरे में ला दिया है। पूरा घोटाला करीब 4 करोड़ 38 लाख रुपए का है। आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में चार करोड़ 38 लाख रुपए कागजों पर ही खर्च कर दिए गए। ज्यादातर कार्यों की न तो कार्ययोजना बनाई गई और ना ही कोई टेंडर निकाला गया। कहा जा रहा है कि इस दौरान बनाई गई कई सड़कें और नालियां ऐसी हैं जिनका अस्तित्व ही नहीं है। कुछ सड़कें ऐसी हैं, जो पूर्व में किसी दूसरी योजना के तहत बन चुकी थीं या उनकी मरम्मत कराई जा चुकी थी। कुछ सड़कें तो ऐसी बी हैं, जिन्हें बरसात के मौसम में बह गया या कटा दिखा दिया गया। जानकारों का कहना है कि यह सारे काम चंद चहेतों से कराए गए थे। बाद में राजनीतिक समीकरण बदलने पर इन्हें दुरुस्त कर लिया गया। पूरे मामले में आश्चर्यजनक पहलू यह भी है कि जिला पंचायत अध्यक्ष व अपर मुख्य अधिकारी के हस्ताक्षर से धन का आहरण होने के बावजूद सिर्फ लिपिक पर कार्रवाई की संस्तुति की गई थी। इस बाबत जिला पंचायत के अपर सुधीर कुमार ने भई माना था कि 94 कार्य अपूर्ण है। संबंधित ठेकेदारों को नोटिस जारी किया गया है लेकिन जिला पंचायत सदस्यों ने अपर मुख्य अधिकारी के बयान को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य अपूर्ण नहीं बल्कि मौके पर न तो निर्माण सामाग्री गिरवाई गई थी और न ही निर्माण कार्य कराए गए थे। अब मामले की परत-दर-परत खुलने पर कुछ ठेकेदारों ने निर्माण सामग्री गिरवाना शुरू कर दी है।

जिला पंचायत अध्यक्ष पर उठ रहे हैं सवाल

घपले और धांधली की परतें खुलने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर सवालों के घेरे में हैं। साथ ही तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी अरविंद राय पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि अपराजिता सोनकर ने अपने चेहते ठेकेदारों को मनमाने तरीके से काम दिए। इसके एवज में उन्हें मोटी रकम मिलती रही। इस कार्य में अरविंद राय भी बराबर के भागीदार बने रहें। भ्रष्टाचार का आलम ये था कि पीडब्ल्यूडी और प्रधानमंत्री ग्राम्य सड़क योजना की सड़कों का निर्माण दिखाकर भुगतान कर लिया गया। जिला पंचायत सदस्य गायत्री देवी का आरोप है कि जिला पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर अभिलेखों में हेराफेरी करके बड़े पैमाने पर घपलेबाजी की गई है। जिस स्थान पर जल निकासी निर्माण कार्य की बात कही गई थी, वहां किसी तरह का निर्माण प्रारंभ ही नहीं हुआ। अपराजिता सोनकर के खिलाफ जिला पंचायत सदस्य अब धीरे-धीरे मुखर होने लगे हैं। विरोध करने वाले सदस्यों में सबसे आगे बीजेपी के ही जिला पंचायत सदस्य हैं। बीजेपी जिला पंचायत सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल ने शहरी विकास मंत्री और वाराणसी के प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना से भी अपराजिता सोनकर की शिकायत की है। कुछ सदस्यों का कहना है कि अगर जल्द ही पार्टी कोई बड़ा फैसला नहीं लाती है तो, अपराजिता सोनकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया जा सकता है।

शुरू हुई मामले की जांच

जिला पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर ठेकेदारों को अग्रिम भुगतान करने के मामले में जांच जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र ने सीडीओ सुनील कुमार वर्मा को सौंप दी है। डीएम के मुताबिक सीडीओ को जांच पूर्व में दी गई थी। अब उन्हें रिमांइडर भेजकर रिपोर्ट तलब की गई है। अगर वह जांच पूरी नहीं कर पाते हैं तो अन्य अफसर से जांच कराई जाएगी। वहीं सीडीओ सुनील कुमार वर्मा का कहना है कि मामले की जांच चल रही है। अपर मुख्य अधिकारी सुधीर कुमार से साल 2016-17 और 2017-18 में कराए गए निर्माण कार्यों की रिपोर्ट मांगी गई है।

सपा के बाद बीजेपी का थामा दामन

साल 2016 के जिला पंचायत चुनावों में अपराजिता सोनकर पहली बार सदस्य चुनकर आईं। इसके बाद अप्रत्याशित रुप से उन्हें अध्यक्ष पद का दावेदार बना दिया गया। 48 सीटों वाले वाराणसी जिला पंचायत में सपा को आराम से बहुमत मिल गया और इसके साथ ही अध्यक्ष पद की कुर्सी पर सबसे कम उम्र की अपराजिता सोनकर आसीन हुईं। माना गया कि साफ-सुथरी छवि और युवाओं के साथ महिलाओं को जोड़ने के लिए सपा ने अपराजिता सोनकर को इस कुर्सी पर बैठाया है। इंजीनियरिंग कर चुकी अपराजिता सोनकर भले ही विकास कार्य नहीं किए लेकिन अपना विकास जरुर कर लिया। यूपी में जैसे ही सत्ता बीजेपी के पास आई, अपराजिता ने भी खेमा बदल लिया। कहा जाता है कि प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने उन्हें बीजेपी ज्वाइन कराया। हालांकि बीजेपी में शामिल होते ही वह पार्टी के लिए सिरदर्द बन चुकी हैं। आए दिन अखबार के पन्ने जिला पंचायत में अनियमितता की खबरों से रंगे रहते हैं। बीजेपी नेताओं के लिए अपराजिता सोनकर के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप एक चुनौती बन गए हैं। विरोधी ये कहते हैं कि अपने ऊपर लग रहे आरोपों से बचने के लिए ही अपराजिता ने बीजेपी ज्वाइन किया है।

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