हिन्दू विधान के अनुसार फादर्स डे नही महालया दिवस मनायें

वाराणसी। पाश्चाय संस्कृति के अनुसार अब देश में फादर्स डे मनाये जाने लगा है लेकिन हिन्दू शास्त्रों में इसके लिए अलग से व्यवस्था है। भारतवर्ष में आश्विन कृष्ण अमावस्या को पितृ स्मृतिदिवस के रूप में मनाया जाता है। पिता से अलग रहकर जीने की कामना भारतीयों के हृदय में कभी नहीं रही। जब पिता वानप्रस्थ लेकर आश्रम चला जाता था तब भी वर्ष में एक बार उससे मिलने संतानें जाया करतीं थी। पिता की छाया में आजीवन रहना और मृत्यु के पश्चात् महालया के दिन उन्हे स्मरण करना भारतीय परम्परा है। हमारे यहाँ पिता को याद करने का दिवस महालया है, फादर्स डे नहीं।

पुरातन परम्परा रही पिता को याद करने की

बीएचयू ज्योतिष विभाग के शोध छात्र पं. गणेश प्रसाद मिश्र के मुताबिक हिन्दू शास्त्रों में पिता की याद में महालया मनाने की पुरातन परम्परा रही है। पाश्चाय संस्कृत का अनुसरण करने के क्रम में अब फादर्स डे मनाये जाने लगा है। उनका मानना है कि पितृ स्नेह की छाया में हमेशा बनें रहें और पितृ मृत्यु के पश्चात पितृतिथि या महालया दिवस मनायें।

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