वाराणसी। उपचुनावों के बाद विश्वविद्यालयों में होने वाले छात्रसंघ चुनावों में बीजेपी की हालत अच्छी नहीं दिख रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र और बीजेपी के अभेद्य गढ़ के रुप में मशहूर वाराणसी में पार्टी की नाक कटते-कटते रह गई। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के बाद शहर के दूसरे सबसे बड़े कॉलेज काशी विद्यापीठ में हुए छात्रसंघ चुनाव में बीजेपी से जुड़ी एबीवीपी सिर्फ एक पद पर ही कब्जा जमा पाई। छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद के अलावा दूसरे सभी महत्वपूर्ण पदों पर एबीवीपी को करारी हार का सामना करना पड़ा।

सछास ने फिर दिखाया दम

छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी और समाजवादी छात्र सभा के बीच जोरदार टक्कर थी। अध्यक्ष पद के लिए एबीवीपी की ओर से मैदान में विकास पटेल थे तो दूसरी ओर सछास ने अंबिका प्रसाद को मैदान में उतारा था। लेकिन आखिर में पलड़ा एबीवीपी का भारी पड़ा। विकास पटेल ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की। उन्हें 2760 वोट मिले वहीं अंबिका प्रसाद को 1126 वोट हासिल हुए। हालांकि अध्यक्ष पद के अलावा उपाध्यक्ष, महामंत्री और पुस्तकालय पद के लिए हुए चुनावों में एबीवीपी को मायूसी हाथ लगी। उपाध्यक्ष पद पर पवन कुमार यादव, महामंत्री पद पर दिगवंत पांडेय और पुस्तकालय पद पर रोशन कुमार राय ने बाजी मारी।

सुबह से रही गहमागमही का माहौल

कैंपस में चुनाव को लेकर सुबह से ही गहमागहमी का माहौल देखने को मिला। सुबह आठ बजे से मतदान प्रारंभ हो गया। चुनाव को शांतिपूर्ण संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। लोकसभा चुनाव के पहले काशी विद्यापीठ चुनाव को जनता का मूड भांपने वाला माना जा रहा था। इस चुनाव पर बीजेपी की स्थानीय ईकाई की नजरें टिकी हुई थी। हालांकि पार्टी को निराशा हाथ लगी है। एबीवीपी को उम्मीद थी कि कम से कम दो पदों पर उसे जीत हासिल होगी। लेकिन उसे सिर्फ एबीवीपी से ही संतोष करना पड़ा।

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