वाराणसी। इसे फ्रांस के साथ सोलर पावर बनने की कवायद का हिस्सा माना जाये या सूबे में सरकार बदलने का असर। मोदी लगभग चार साल से काशी के सांसद हैं। इससे पहले भी जापान के पीएम शिंजो आबे सरीखे विदेशी राष्ट्राध्यक्ष उनके साथ काशी आ चुके हैं लेकिन इस बार मंजर कुछ बदला सा था। समूचे शहर को दुल्हन की तरह सजाने के साथ राजसी अंदाज में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों का सोमवार को स्वागत हुआ। अस्सी की चर्चित अड़ी पर बनारसी अंदाज में टिप्पणी थी कि, आबे में त अंधार रहल लेकिन एदा अजोरे में झकझोर व्यवस्था रहल। सोने क थरिया में भोजन त फ्रांसो में न कईले होई।

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स्कूलों में अघोषित छुट्टी, बच्चों ने किया स्वागत

शहर की सड़कों से लेकर गंगा के घाटों तक फ्रांस के राष्ट्रपति के भव्य स्वागत में कोई कसर नहीं छोड़ी गयी थी। जहां एक तरफ लंका पर महिलाएं पारंपरिक नृत्य करती रही तो घाटों पर छात्र दोनों देशों के राष्ट्रीय ध्वज को हाथ में लेकर विदेशी राष्ट्राध्यक्ष का स्वागत करते दिखे। बाबतपुर हवाई अड्डे पर जब फ्रांस के राष्ट्रपति पहुंचे तो खुद पीएम मोदी ने उन्हें गले लगाकर स्वागत किया। बड़ा लालपुर स्थित पं.दीनदयाल सांस्कृतिक हस्तकला संकुल में भारतीय परंपरा के अनुसार शहनाई बजा कर वह दोनों राष्ट्राध्यक्ष का सम्मान दिया गया। यही नहीं मोदी से विदा लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों वापस बाबतपुर एयरपोर्ट जा रहे थे तो भोजूबीर में सैकड़ों की संख्या में छात्र विदाई के लिए मौजूद थे। स्कूलों में अघोषित अवकाश था और छात्र बीजेपी कार्यकर्ताओं की तरह दोनों देश के झंडे लेकर स्वागत करते दिखे।

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