चंदौली। सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह यादव एक दशक पहले सूबे के मुख्यमंत्री थे। उनके बाद प्रदेश में बसपा के बाद सपा की सरकार रही। बावजूद इसके जनपद ही नहीं प्रदेश स्तर पर हुआ दवा घोटाला दवा रहा। पिछले दिनों भाजपा की सरकार बनने के बाद मामले में तेजी आ गयी है। आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) ने कोतवली में उत्तर प्रदेश ड्रग एण्ड फार्मास्टयूटिकल लिमटेड (यूपीडीपीएल) की नकली दवाएं सरकारी अस्पतालों में खपाने और दोहरा भुगतान करने के घोटाले में चंदौली के दो पूर्व सीएमओ सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। दरअसल इस घोटाले की जांच ईओडब्ल्यू द्वारा तेजी से की जा रही है। सूत्रों की माने तो आने वाले दिनों में चन्दौली की ही तरह कुछ अन्य जिलों में तैनात रहे सीएमओ, सीएमएस और स्वास्थ्य विभाग के अन्य अफसरों के खिलाफ भी ऐसी ही कार्रवाई हो सकती है।
नकली दवाओं से अरबों का घोटाला
एफआईआर में नामजद होने वालों पर आरोप है कि इन्होंने वर्ष 2004-05 और 2005-06 के सपा शासनकाल में सीएमओ के दफ्तरों के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से यूपीडीपीएल की नकली दवाएं मुख्य औषधि भण्डार से स्वास्थ्य केन्द्रों पर आपूर्ति कराई। अरबों रुपये के घोटाले के मामले में जिन सात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है उनमें तत्कालीन सीएमओ चन्दौली डा. उपेन्द्र कंचन, तत्कालीन सीएमओ चन्दौली डा. उदय प्रताप सिंह, तत्कालीन चीफ फार्मासिस्ट मुख्तार अहमद, यूपीडीपीएल के तत्कालीन उप प्रबंधक विपणन डी.एल.बहुगुणा,यूपीडीपीएल के तत्कालीन अधिशासी वाणिज्यिक अधिकारी वीएस रावत, दवा आपूर्ति फर्म प्रिया फार्मास्यूटिकल वाराणसी के प्रोपराइटर राजेश सिंह और मेसर्स दाऊ मेडिकल सेण्टर आगरा के प्रोपराइटर सुरेश चौरसिया शामिल हैं।
असली फर्म की तरफ से हुई थी शिकायत
दरअसल, इस मामले में कानपुर के पनकी डी. ब्लाक के मेसर्स निर्मल इण्डस्ट्रीज एंड कंपनी के प्रवीण सिंह ने ईओडब्ल्यू में 28 फरवरी 2006 को एक प्रार्थना पत्र देकर शिकायत की थी कि यूपीडीपीएल प्रदेश सरकार पोषित एकमात्र औषधिक निर्माण इकाई है। जिसके द्वारा उत्पादित दवाएं सप्लाई होती है। बगैर सप्लाई के दवाएं अस्पतालों तक पहुंच रही है। मामले काफी समय तक दबा रहा लेकिन भाजपा सरकार बनने के बाद इसमें तेजी आ गयी।

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