वाराणसी। अमूमन अपराधियों के बारे में माना जाता है कि वह वारदात को अंजाम देकर ऐशो-आराम से दिन बिताते हैं लेकिन क्राइम ब्रांच ने मुठभेड़ के दौरान ऐसे गिरोह को पकड़ा जो सड़क किनारे पन्नी डाल कर रहता था। सरगना धर्मेन्द्र नट मूल रूप से सासाराम (बिहार) का रहने वाला है लेकिन किसी स्थान पर 10 दिन से अधिक नहीं टिकता। फूलपुर में छह साल पहले उसने डकैती के दौरान कई लोगों को जख्मी बी कर दिया था जिसके बाद इनाम की घोषणा की गयी थी। एसएसपी आरके भारद्वाज ने मंगलवार को गिरफ्तारी और बरामदगी करने वाले इंस्पेक्टर विक्रम सिंह के अलावा उनकी टीम को नकद पुरस्कार भी दिया है।

रेकी के बाद देते थे वारदात को अंजाम

एसएसपी के मुतबिक शहर से सटे ग्रामीण इलाकों में सड़क के किनारे पन्नी डाल कर गिरोह टिकता था। गिरफ्तार पांचो बदमाश घुमंतू जनजाति नट के हैं जो खाना ादोश की जिन्दगी जीते है। दिनभर पन्नी बिनते समय एकान्त घर की रेकी कर लेते है और मौके देखकर रात में चोरी करते है। कभी कभी ट्रेनों में भी यात्रियों के बैग चुरा लेते है। चोरी, लूट और डकैती से इन लोगों का खर्चा चलता है। जब भी इनमें से कोई पुलिस द्वारा पकड़ा जाता है तो फर्जी नाम पता बताकर जेल चले जाते है।

नाम खुलता नहीं जिससे रहते हैं बचे

रमईपुर मंगारी मोड़ पर क्राइम ब्रांच व फूलपुर के साथ मुठभेड़ में धमेन्द्र नट के अलावा पप्पू नट, दीपक नट, लल्लन राम, सत्य नारायण राम के पास से तीन तमंचे, लूट का 11 हजार रुपया और मोबाइल समेत दूसरे सामान मिले हैं। गिरफ्तार बदमाशों ने गाजीपुर, बलिया, वाराणसी, चन्दौली व बिहार में कई जगहों पर संगीन वारदातों को अंजाम देना स्वीकार किया है। नाम न खुलने की वजह से यह हमेशा बचते रहे हैं। फूलपुर की संगीन वारदात के बाद से धर्मेन्द्र गिरोह के संग कई बार वह आया लेकिन किसी को पता नहीं चला। इनके अपराधिक इतिहास के बारे में जानकारी की जा रही है।

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