देव दीपावली: जान्हवी के तट असंख्य दीयों से हुए जगमग, भोर से लेकर देर रात तक गंगा तट पर उमड़ा हुजूम

वाराणसी। महज कुछ दशक पहले देव दीपावली पर अयोजन उस तरह नहीं होते थे जैसा अब होने लगा है। धर्मनगरी काशी का यह उत्सव लक्खा मेले का स्वरूप ले चुका है जिसे देखने के लिए पूरी दुनिया से लोग आते हैं। मंगलवार को जहां भोर से कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान करने वालों की भीड़ गंगा तट पर थी तो दोपहर बाद देव दीपावली की तैयारियां अंतिम रूप लेने लगी। अंधेरा होने के बाद ऐसा लग रहा था कि असंख्य दीपकों ने मां गंगा की आरती उतारी है। गंगा की आरती…

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गंगा एक प्राकृतिक संसाधन के रूप में देश की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा रही हैं: आनंदीबेन

वाराणसी। भारतीय संस्कृति में पर्वों का विशेष महत्व है। तमसो मा ज्योतिगर्मय का प्रतीक पर्व दीपावली हमें अंधेरे से लड़ने की प्रेरणा देता है। गत 26 अक्टूबर को अयोध्या में 5 लाख 51 हजार दीपों से दीपावली उत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ था और आज यहां काशी के 84 घाटों पर 21 लाख दीपों से देव दीपावली यानी देवताओं की दीपावली मना कर उत्सव का समापन हो रहा है। काशी के 84 घाटों पर प्रज्वलित दीप गंगा की छटा मनोरम, अद्भुत एवं अविस्मरणीय बना रहे हैं। देव दीपावली का यह…

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सर्जिकल स्ट्राइक में भी भारत ने बुद्ध के सिद्धांतों का रखा था ध्यान, इंद्रेश कुमार का मानना छुआछूत की भावना सबसे बड़ी महामारी

वाराणसी। हमला भले दुश्मन देश के खिलाफ उसकी जमीं पर था लेकिन भारत ने पाकिस्तान पर की गयी सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान भी भगवान बुद्ध के सिद्धांतों को ध्यान में रखा था। भारत ने इसका पूरा ध्यान रखते हुए उन्हीं जगहों पर हमला किया जहां इंसान को शैतान बनाया जा रहा था। भारत कभी भी अहिंसा परमो धर्म: का रास्ता नहीं त्यागेगा। आल इंडिया एक्सिक्यूटिव मेंबर आरएसएस एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच मुंबई के मार्गदर्शक डॉ इंद्रेश कुमार ने महाबोधि सोसाइटी आॅफ इंडिया की ओर से मूलगंध कुटी बौद्ध मंदिर के…

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तथागत के अस्थि अवशेष की निकली शोभायात्रा में जुटे देश-विदेश से अनुयायी

वाराणसी। तथागत बुद्ध के पवित्र अवशेषों का आम लोगों के लिए दर्शन सुलभ नहीं रहते लेकिन साल के तीन दिन ऐसे होते हैं जह इसके लिए देश-विदेश से लोग जुटते हैं। दरअसल कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर महाबोधि सोसाइटी आॅफ इंडिया की सारनाथ शाखा इसकी अनुमति देती है। इसके क्रम में मंगलवार को मूलगंज कुटी बौद्ध मंदिर से भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थि अवशेष की शोभायात्रा निकाली गई। नेतृत्व सोसायटी के महासचिव भिक्षु पी शिवली थेरो ने किया। वियतनामी भिक्षुओं ने की इस बार अगुवाई इस शोभा यात्रा में सबसे…

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इस खातिर प्रबोधिनी एकादशी से आरम्भ नहीं हुई लग्न, अब 19 नवम्बर से गूंजेगी चार महीने से बंद शहनाई

वाराणसी। माना जाता है कि भगवान क्षणभर भी सोते नही, फिर भी भक्तों की भावना ‘यथा देहे तथा देवे’ के अनुरुप भगवान भी चार मास शयन करते हैं। भगवान विष्णु के क्षीरशयन के विषय में यह कथा प्रसिद्ध है कि भगवान ने भाद्रपद मास की शुक्ल एकादशी को महापराक्रमी शंखासुर नामक राक्षस को मारा था और उसके बाद थकावट दूर करने के लिए क्षीरसागर में जाकर सो गये। वे वहाँ चार मास तक सोते रहे और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जगे। इसी से इस एकादशी का नाम देवोत्थापनी या ‘प्रबोधनी…

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