भगवान विष्णु तथा शिव के ऐक्य का प्रतीक है ‘वैकुण्ठ चतुर्दशी’, सोमवार को इस तरह करें पूजन

वाराणसी। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी ‘नरक चतुर्दशी’ व शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी ‘वैकुण्ठ चतुर्दशी’ कहलाती है। नरक चतुर्दशी को नरक के अधिपति यमराज की और वैकुण्ठ चतुर्दशी को वैकुण्ठाधिपति भगवान श्रीविष्णु की पूजा की जाती है। यह तिथि अरुणोदय व्यापिनी ग्रहण करनी चाहिए जो इस वर्ष 11 नवम्बर 2019 को पड़ रही है। इसमें प्रात: काल स्नानादि से निवृत्त होकर दिनभर का व्रत करना चाहिए और रात्रि में भगवान विष्णु की कमल पुष्पों से पूजा करनी चाहिए। तत्पश्चात् भगवान शंकर की यथा विधि पूजा करनी चाहिये। रात…

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तमाम ‘निर्देशों’ पर भारी पड़ा यह ‘आदेश’, फैसला मंदिर को लेकर लेकिन मयखानों की बंदी से नहीं मना ‘जश्न’

वाराणसी। श्री राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले ही पुलिस एलर्ट मोड पर थी। आशंका जतायी जा रही थी कि इस निर्णय के विरुद्ध यदि किसी व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया (ट्वीटर/फेसबुक/व्हाट्सअप/इन्स्ट्राग्राम/यूट्यूब/मैसेन्जर आदि) पर आपत्तिजनक या भ्रामक सूचना फैलायी तो आपसी भाई-चारा और सौहार्दपूर्ण वातावरण प्रभावित होने की संभावना रहेगी। ऐसे मैसेजों पर पूर्णतया प्रतिबन्ध लगाने के साथ एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने चेताया था कि अगर इस तरह के मैसेज किसी के संज्ञान में आते है तो तत्काल सोशल मीडिया सेल के मो 7839857011 को सूचित…

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गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल कायम रखने खातिर पुख्ता प्रबंध, डीएम ने की शांति-कौमी एकता एवं सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने की अपील

वाराणसी। दशकों से चल रहे अयोध्या में रामजन्मभूमि विवाद को लेकर फैसला भले शनिवार को आया लेकिन प्रशासन ने इसकी तैयारियां पहले से कर रखी थी। डीएम कौशल राज शर्मा ने जिले को जोनल एवं सेक्टर में विभाजित कर मजिस्ट्रेट एवं पुलिस अधिकारियों की तैनाती की। तीनों जोनल एवं सेक्टर मजिस्ट्रेटों को अपने-अपने तैनाती क्षेत्रों में चक्रमण करते रहने के निर्देश डीएम ने उनके साथ आपात बैठक में दिये। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के परिप्रेक्ष्य में कानून एवं शान्ति व्यवस्था व साम्प्रदायिक सौहार्द बनाये रखने हेतु मजिस्ट्रेटों को निर्देश दिये…

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