वाराणसी। लगभग एक साल पहले अपने घर में भभुआ (बिहार) निवासी पिंंकू अंसारी की हत्या कराने के बाद मुकदमे का वादी बनने के लिए अभिषेक प्रिंस ने खुद को अधिवक्ता बताते हुए खासा दबाव बनाया था। पुलिस ने उसकी तहरीर के आधार पर उन्हें नामजद किया था जिनके उपर कातिलाना हमले के मामले में सजा हो सकती थी। बाद में मामले की पर्ते खुलती गयी तो चौंकाने वाले खुलासे हुए। रविवार को छापेमारी के दौरान क्राइम ब्रांच प्रभारी इंस्पेक्टर विक्रम सिंह और इंस्पेक्टर कैंट राजीव रंजन की टीम ने प्रिंस को दबोचा तो उसने सच कबूल किया। पुलिस के मुताबिक किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने या दिलाने से पहल ेप्रिंस खुद को कचहरी में सक्रिय दिखाता था। वहां नामचीन वकीलों के आसपास काली कोट पहन कर वह पुलिस पर दवाब बना लेता था।

आधा दर्जन संगीन मामलों का है आरोपित

खुद को अधिवक्ता बताने वाले अभिषेक प्रिंस के खिलाफ हत्या, हत्या प्रयास, आर्म्स एक्ट, गैंगेस्टर एक्ट सहित अन्य आरोपों में छह मुकदमे दर्ज हैं। एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह के मुताबिक गिरफ्तार प्रिंस को अदालत में पेश कर पुलिस ने जेल भेज दिया। पिछले महीने पांच जून को क्राइम ब्रांच और कैंट पुलिस ने इनामी बदमाश सादिक खान और जावेद खान को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो स्पष्ट हुआ था कि अवैध असलहों की बिक्री के दो लाख रुपये के लेनदेन के विवाद में प्रिंस के घर पर पिंकू की हत्या की गई थी। हत्या करने वालों में सादिक, जावेद, इमरान और खुद प्रिंस भी शामिल थे। प्रिंस 2014 से अवैध असलहे बिहार से लाकर बेच रहा है। उसके गिरोह में जेल में बंद सादिक, जावेद, कल्लू शर्मा, वीरू तिवारी और इमरान हैं। यह गिरोह अवैध असलहों की तस्करी के साथ ही भाड़े पर हत्या करता है।

असलहे का कारोबार, सौ प्रतिशत लाभ

प्रिंस ने कबूल किया कि मुंगेर (बिहार) के राजेश और चंदन से 13 से 15 हजार रुपये में अवैध पिस्टल खरीद कर बनारस और आसपास के जिले में 30 हजार रुपये में वह बेचता था। जमीन के विवाद को लेकर बनियापुर रजनहिया के भोली की हत्या की थी योजना बनायी लेकिन ऐन वक्त पर पुलिस ने शूटरों को धर-दबोचा।

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