वाराणसी। पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी में एक पखवारे पहले हुए जेएचवी मॉल में हुए गोलीकांड की गूंज लखनऊ ही नहीं दिल्ली तक पहुंची थी। पुलिस के लिए वारदात बड़ी चुनौती थी क्योंकि पंंचम तल से इसकी समीक्षा हो रही थी। मुख्य आरोपित आलोक उपाध्याय को गिरफ्तार करने के बाद स्पष्ट हुआ था कि शेष दोनों बदमाश प्रदेश की सीमा पार कर शरण लिये हैं। मंगलवार की रात भोजपुर (बिहार) में इनामी बदमाश हीरो के मारे जाने के दौरान कुंदन की गिरफ्तारी के बाद बचे ऋषभ सिंह रीशू का हौसला टूूट गया था। वह कोर्ट में आत्मसमर्पण करने की फिराक में आया था लेकिन गुरुवार की देर शाम सटीक सूचना पर पुलिस ने घेर लिया। पिसौर पुल (लोहता) के समीप पुुलिस को देख रीशू ने फायरिंग करते हुए भागने की कोशिश की लेकिन गोली लगने के कारण गिर गया। मुठभेड में गोली लगने से क्राइम ब्रांच का सिपाही सुरेन्द्र मौर्या भी जख्मी हुआ है। इस दौरान रीशू का साथी बाइक समेत भागने में सफल रहा।

कप्तान के भरोसे पर खरी उतरी टीम

प्रदेश भर में चर्चित वारदात के बाद फौरी तौर पर इंस्पेक्टर कैंट राजीव रंजन और चौकी इंचार्ज नदेसर को लाइन हाजिर कर दिया गया था लेकिन एसएसपी आनंद कुलकर्णी ने अधीनस्थों पर भरोसा बनाये रखा। एसपी सिटी दिनेश कुमार सिंह और एसपी क्राइम ज्ञानेंद्रनाथ प्रसाद रोजाना मानीटरिंग कर रहे थे। बिहार में कुंदन की गिरफ्तारी के बाद भेजी गयी टीम को पूछताछ में अहम जानकारियां मिली थी। इस पर गुरुवार को सादे वेश में कोर्ट के आसपास टीम लगायी गयी थी। पुलिस सक्रियता के चलते रीशू समर्पण नहीं कर सका लेकिन क्राइम ब्रांच प्रभारी विक्रम सिंह को सूचना मिली िक एक साथी के संग पिसौर पुल होते जाने वाला है। इस पर लोहता प्रभारी राकेश सिंह और शिवपुर प्रभारी नागेश सिंह के साथ घेराबंदी की। मुठभेड़ के बाद पुख्ता शिनाख्त होने पर पुलिस टीम के चेहरे खिल उठे। मौके से रिशू की .32 बोर की पिस्टल के अलावा खोखा-कारतूस बरामद हुए हैं। फरार बदमाश की तलाश की जा रही है।

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