वाराणसी। माफिया डान मुन्ना बजरंगी की बागपत जेल में हत्या को तीन सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है। पुलिस और दूसरी एजेंसियां इस मामले की पड़ताल में जुटी हैं। साथ ही उस मामले की भी जांच में तेजी आयी है जिसके चलते बजरंगी को झांसी जेल से यहां लाने की नौबत आयी थी। दरअसल बडौत के पूर्व विधायक लोकेश दीक्षित और उनके भाई नारायण दीक्षित से सितंबर 2017 में रंगदारी मांगे जाने के मामले में बजरंगी के ‘करीबी’ संजय राव को पुलिस ढूंढती वाराणसी तक का चक्कर लगा चुकी है लेकिन वह नहीं मिला है। बहरहाल पुलिस ने संंजय राव के महमूरगंंज (सिगरा) स्थित आवास पर गवाहों की मौजूदगी में नोटिस चस्पा कर उसे पेश होने को कहा है।

फिलहाल गिरफ्तारी नहीं, बस चाहिये ‘आवाज’

इस बाबत इंस्पेक्टर कोतवाली बागपत दिनेश कुमार का कहना है कि पूर्व विधायक से रंगदारी मांगने के मामले में लखनऊ निवासी सुल्तान को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। उससे पूछताछ के अलावा सर्विलांस की जांच में स्पष्ट हुआ कि फोन करने वाला बजरंगी का करीबी बनारस निवासी संजय राव है। तलाश में दबिश दी गयी तो उसने हाईकोर्ट से स्टे हासिल कर लिया था। फिलहाल उसकी गिरफ्तारी नहीं की जानी है बल्कि उसके वॉयज सैम्पुल को लेकर जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला आगरा भेजा जाना है जिससे स्पष्ट हो सके कि फोन उसी ने किया था या किसी दूसरे ने। विवेचना का यह अहम हिस्सा है जिसके लिए संजय राव की दरकार है।

कैदियों से पूछताछ और शिफ्टिंग जारी

दूसरी तरफ 9 जुलाई की अल सुबह बजरंगी की जेल में हत्या के बाद पुलिस ही नहीं एसटीएफ की टीम ने यहां निरुद्ध एक दर्जन से अधिक बंंदियों से कई राउंड पूछताछ की है। इनमें से काफी आरोपित सुनील राठी के करीबी है तो कई बजरंगी से जुड़े भी बताये गये हैं। कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबरों की भी पड़ताल की जा रही है। हत्याकांड के बाद सुनील राठी को फतेहगढ़ जेल भेज दिया गया था लेकिन दूसरी बंदियों को भी हटाने की सिलसिला जारी है। इसके तहत मंगलवार को चार कैदियों को दूसरी जेलों में भेजा गया है।

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