संकटमोचन पर हुआ पूर्वांचल की ऐतिहासिक श्री हनुमान ध्वजायात्रा का समापन, हजारों भक्त हुए शामिल

वाराणसी। एक दिन पहले गुरुवार को लगभग 40 किलोमीटर दूर कनकसराय व रामसिंहपुर से प्रारंभ हुई श्री हनुमान ध्वजायात्रा में का शुक्रवार को संकटमोचन दरबार में समापन हुआ। छोटे बड़े ध्वजा कुल मिलाकर 11 हजार ध्वजाओं पताकाओं के लहराते साये में भक्तों की सैकड़ों टोलियां राम नाम की मस्ती में मदमस्त चलती संकटमोचन दरबार पहुंची थी। शोभायात्रा में 201 आरती की थालियों संग हजारों महिलाओं का हुजूम राम नाम व महाबली के भजनों पर थिरकते हुए धूप व भीषण गर्मी की परवाह न करते हुए संकटमोचन दरबार तक आये। लगभग 60-70 की संख्या में विभिन्न प्रकार से सजी झांकियां शोभायात्रा में सम्मिलित होकर इसको भव्यता प्रदान किये।

कल्याण की भावना आयोजन का उद्देश्

इस यात्रा का आयोजन महाबली हनुमान जी के जन्मोत्सव को, भव्यता के साथ मनाते हुए समाज में व्याप्त जाति-धर्म, ऊंच-नीच, भेदभाव और राजनैतिक स्वार्थ से परे समाज कल्याण, परिवार कल्याण, देश कल्याण के साथ ही आपसी भाईचारा का भावना विकसित करने के उद्देश्य से किया जाता है। इस वर्ष भी यात्रा में पूर्वांचल के कई जनपदों से भी ध्वजयात्राऐं सम्मिलित हुई, जैसे अदलपुरा, कनकसराय, मिजार्पुर, रामसिंहपुर, कोनियां, डाफी, सुन्दरपुर, खोजवाँ जानकी नगर, शिवरतनपुर, जलाली पट्टी, अहमदाबाद, गुजरात, इत्यादि क्षेत्रों से ध्वजा लेकर भक्तगण दर्जनों झांकियों, के साथ हजारों की संख्या में भिखारीपुर पहुँचकर मुख्य शोभा यात्रा में सम्मिलित हुए।

चढ़ाया गया सवा 11 मनी प्रसाद

शोभायात्रा के 60 फीट लंबे मुख्यरथ पर श्री संकट मोचन मंदिर की प्रमुख कीर्तन मंडली द्वारा राम दरबार की झांकी के सम्मुख अपने भक्ति भजनों के सुरों से राम नाम की अमृत वर्षा किया गया। इस वर्ष भी श्री हनुमत सेवा समिति परिवार की तरफ से बाबा को सवा 11 मनी प्रसाद चढ़ाया गया। आयोजन से जुड़े रामबली मौर्या का दावा है कि शोभायात्रा की कुल लम्बाई लगभग डेढ़ से दो किलोमीटर रही होगी जिसमें 50 हजार भक्त शामिल रहे होंगे। यात्रा का समापन मन्दिर के महन्त प्रोफेसर विशम्भरनाथ मिश्र के हाथों से भक्तों में प्रसाद वितरण के बाद हुआ।

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