बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय के समर्थक महागठबंधन से निराश, बैकडोर से एनडीए में इंट्री पर टिकी आस

लखनऊ। पूर्व सांसद धनंजय सिंंह अपने राजनैतिक कैरियर के अहम मोड पर पहुंच चुके हैं। पिछले तीन चुनावों में लगातार पराजय से समर्थकों का भरोसा टूट रहा है। पिछला विधानसभा चुनाव निषाद पार्टी के टिकट पर लड़कर तीसरे स्थान पर रहने के बावजूद भरोसा था कि बंटवारे में दो-तीन सीट मिली तो भी चुनाव निकल जायेगा। गोरखपुर उपचुनाव के बाद एक तरह से निषाद पार्टी पूरी तरह से सपा में शामिल हो गयी। पार्टी संस्थापक डा. संजय निषाद के पुत्र प्रवीण तक सपा के टिकट पर आ गये। महागठबंधन में समझौते के तहत जौनपुर सीट बसपा के कोटे में आयी है जिसके शीर्ष नेताओं से रिश्ते पहले से खराब हैं। तेजी से बदले समीकरणों में महागठबंधन में कोई इंट्री का सवाल नहीं है। अब यू टर्न लेते हुए दूसरे विकल्पों पर विचार चल रहा है।

छोटे दल से टिकट की लग रही जुगत

सूत्रों की माने तो पूर्व सांसद इन दिनों बैकडोर से एनडीए में इंट्री की जुगत में पूरा जोर लगाये हैं। पहले भी वह जदयू और लोजपा के टिकट पर विधायक चुने गये थे। छोटे दलों का टिकट और एनडीए का वोटबैंक उन्हें खासा सुहाता रहा है। इसके तहत यूपी की सत्ता में साझीदार छोटे दलों से सम्पर्क ही नहीं साधा गया है बल्कि जीत की गारंटी के साथ ‘दूसरे’ वायदे भी किये जा रहे हैं। बावजूद इसके पेंच फंसता जा रहा है क्योंकि जौनपुर सीट से भाजपा के सांसद पहले से हैं। इसके अलावा लखनऊ से दिल्ली तक पूर्व सांसद का विरोध करने वालों की कमी नहीं जो पहले हुई पराजयों के लिए उन्हें जिम्मेदार मानते हैं। अलबत्ता कुछ समर्थन करने वाले भी लेकिन वह मुखर होकर अपनी बात रखने से कतराते हैं।

कई सीटों पर लगे थे होर्डिंग-पोस्टर

गौरतलब है कि धनजंय सिर्फ जौनपुर के लिए भी प्रयासरत नहीं थे बल्कि आसपास की दूसरी सीटों पर भी उनकी नजर थी। कुछ माह पहले उनकी दावेदारी को लेकर प्रतापगढ़ और सुल्तानपुर सीमा तक बोर्डिंग-पोस्टर लगे थे। सुल्तानपुर की सीट भी बसपा के कोटे में है और वहां से एक दूसरे बाहुबली के आने के आसार हैं। ऐसे में वहां जाकर चुनाव लड़ना कहीं से आसान नहीं होगा। प्रतापगढ़ की सीट भाजपा ने सहयोगी दल को दी थी लेकिन उस पार्टी के रुख रंग कुछ ऐसे चल रहे हैं कि एनडीए का हिस्सा रहने पर ही सवाल उठ रहे हैं। जिस दल से उम्मीद लगायी है उसने कभी जौनपुर के लिए दावेदारी ही नहीं की। उसके कोटे में दो सीटे आयेंगी तो भी दूसरी। देखना है कि ऊंट किस करवट बैठता है क्योंकि धनंजय भी पुराने खिलाड़ी हैं और अपने पत्ते ऐन वक्त पर चलते हैं।

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