#53साल के इतिहास में पहली बार विहिप के अध्यक्ष के लिए वोट डाले गए. पूर्व जस्टिस विष्णु सदाशिव कोकजे नए अध्यक्ष चुने गए. कोकजे को 131 और उनके प्रतिद्वन्द्वि राघव रेड्डी को सिर्फ 60 वोट मिले. पहले रेड्डी ही अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, लेकिन तोगड़िया से उनकी नजदीकी थी, जिसके कारण संघ उन्हें हटाना चाहता था. कोकजे हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल भी रह चुके हैं.

#अध्यक्ष चुने जाने के बाद पूर्व जस्टिस कोकजे ने तत्काल बैठक बुलाकर पदाधिकारियों का चयन किया. उन्होंने तोगड़िया की जगह आलोक कुमार को कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया. उसके बाद तोगड़िया ने विहिप छोड़ने का एलान कर दिया.

#दरअसल पहले तोगड़िया और पीएम नरेन्द्र मोदी साथ-साथ थे. लेकिन धीरे-धीरे उनके रिश्ते बिगड़ने लगे. स्थिति यह हो गई कि एक दिन अचानक तोगड़िया अपने घर से लापता हो गए. बाद में वह अस्पताल में मिले. तब तोगड़िया ने प्रेस कांफ्रेस करके गुजरात और राजस्थान की बीजेपी सरकार पर अपनी हत्या करने की साजिश रचने का आरोप लगाया था. तोगड़िया ने “राममंदिर” की उपेक्षा करने का भी बीजेपी पर आरोप लगाया है. फिलहाल वह अपनी आत्मकथा लिख रहे हैं, जिसमें कई तथ्यों का खुलासा होने की संभावना है. तोगड़िया के विहिप छोड़ने की राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो काफी महत्व है.

#वैसे तोगड़िया अब आजाद हो गए हैं. और उन्हें कुछ दिन काशी में आकर विश्राम करना चाहिए. कहते हैं कि गुजरात में पाटिदार आन्दोलन के पीछे भी उनका हाथ था. जब वह लापता होने के बाद अस्पताल में भर्ती थे, तब पाटिदार आन्दोलन के नेता हार्दिक पटेल उनसे मिलने गए थे. कुछ कांग्रेसी नेता भी उनसे अस्पताल में मिले थे. गुजरात में तोगड़िया पिछले कुछ दिनों से किसानों की समस्या भी उठाते रहे हैं. गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी को उनके कारण काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था.

बदले राजनीतिक हालात में बनारस यानी काशी (क्योटो) उनके लिए नई पारी शुरू करने के लिए उपयुक्त स्थान हो सकता है. जब वह विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष थे, तो अक्सर काशी आते थे. सभा व बैठकों में “हिन्दुत्व” के मुद्दे पर जिस तरह दहाड़ते थे, वह मुझे अब भी याद है. उनकी सभा की रिपोर्टिंग करने का मुझे कई बार अवसर मिला था. लेकिन मीडिया के सामने उन्हें रोते हुए देखकर मुझे आश्चर्य हुआ. हिन्दुत्व का यह “शेर” अंदर से इतना कमजोर है, सहसा विश्वास ही नहीं हुआ. दरअसल जो गरजते हैं, वो बरसते नहीं. अब उन्हें शांति की तलाश में जरूर काशी आना चाहिए. 35 साल पूर्व अहमदाबाद में तोगड़िया और नरेन्द्र मोदी एक साथ आरएसएस की यूनीफार्म पहनकर शाखा में “सदा वत्सल्य मातृभूमि” प्रार्थना गाते थे. लेकिन बदले हालात में मोदी प्रधानमंत्री बन गए और तोगड़िया को अब विहिप छोड़ने का ऐलान करना पड़ा है. इसे व्यक्तित्व व शक्ति का टकराव भी कह सकते हैं.
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साभार – वरिष्ठ पत्रकार सुरेश प्रताप सिंह के फेसबुक वाल से…

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